वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
विकल्प की डिजिटल दुनिया
साहित्य-संस्कृति

छिछले प्रश्न गहरे उत्तर

बच्चा लाल 'उन्मेष'14 अप्रैल 20262 मिनट पठन55 बार पढ़ा गया
कौन जात हो भाई? "दलित हैं साब!"

 जात हो भाई?

"दलित हैं साब!"

नहीं मतलब किसमें आते हो?

आपकी गाली में आते हैं

गन्दी नाली में आते हैं

और अलग की हुई थाली में आते हैं साब!

मुझे लगा हिन्दू में आते हो!

आता हूँ न साब! पर आपके चुनाव में।

क्या खाते हो भाई?

"जो एक दलित खाता है साब!"

नहीं मतलब क्या क्या खाते हो?

आपसे मार खाता हूँ

कर्ज़ का भार खाता हूँ

और तंगी में नून तो कभी अचार खाता हूँ साब!

नहीं मुझे लगा कि मुर्गा खाते हो!

खाता हूँ न साब! पर आपके चुनाव में।

क्या पीते हो भाई?

"जो एक दलित पीता है साब!

नहीं मतलब क्या क्या पीते हो?

छुआ-छूत का गम

टूटे अरमानों का दम

और नंगी आँखों से देखा गया सारा भरम साब!

मुझे लगा शराब पीते हो!

पीता हूँ न साब! पर आपके चुनाव में।

क्या मिला है भाई?

"जो दलितों को मिलता है साब!

नहीं मतलब क्या क्या मिला है?

ज़िल्लत भरी जिंदगी

आपकी छोड़ी हुई गंदगी

और तिस पर भी आप जैसे परजीवियों की बंदगी साब!

मुझे लगा वादे मिले हैं!

मिलते हैं न साब! पर आपके चुनाव में।

क्या किया है भाई?

"जो दलित करता है साब!

नहीं मतलब क्या क्या किया है?

सौ दिन तालाब में काम किया

पसीने से तर सुबह को शाम किया

और आते जाते ठाकुरों को सलाम किया साब!

मुझे लगा कोई बड़ा काम किया!

किया है न साब! आपके चुनाव का प्रचार।

अपलोडर: राजीव कुमार पाण्डेय

विज्ञापन
और पढ़ें
सभी देखें →
साहित्य-संस्कृति

युग-प्रवर्तक भारतपथिक राममोहन राय :- विद्युत पाल

रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने स्पष्टत: कहा कि राममोहन राय ने भारत में आधुनिक युग का उद्घाटन किया, आज के विश्वजनीन सहयोग के जमाने की मानवता में हमारी दीक्षा उन्होंने ही सम्पन्न किया।

श्रेया जायसवाल22 मई 2026

साहित्य-संस्कृति

राममोहन राय - रवीन्द्रनाथ ठाकुर

राममोहन के युग में पूरी दुनिया में वे एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने आधुनिक युग के वास्तविक अर्थ को पूर्ण रूप से समझा था। वे जानते थे कि अलग-अलग संकीर्ण स्वतंत्रता मानव-साधना का उद्देश्य नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत और राष्ट्रीय स्तर पर सार्वभौमिक पारस्परिक निर्भरता और बंधुत्व में ही मानव-सभ्यता की सार्थकता है। अपने अगाध ज्ञान और सहज अंतर्दृष्टि के बल पर उन्होंने मानवता के इस आदर्श को समाज, साहित्य और धर्म के क्षेत्र में संचारित किया।

श्रेया जायसवाल22 मई 2026

साहित्य-संस्कृति

"कवि नज़रुल और तत्कालीन राजनीति" - जियाद अली

मार्च 1920 में ब्रिटिश सरकार ने 49 वीं बंगाली रेजिमेंट को भंग कर दिया। इसके बाद नज़रुल कोलकाता लौट आए। देश के स्वतंत्रता आंदोलन को संगठित करने के उद्देश्य से, उन्होंने मार्च 1920 से मुजफ्फर अहमद के साथ मिलकर साम्यवादी दल बनाने का प्रयास शुरू कर दिया। जनमत तैयार करने के लिए 12 जुलाई 1920 को नज़रुल और मुजफ्फर अहमद के संपादन में सांध्य दैनिक 'नवयुग' का प्रकाशन शुरू हुआ। उनका मानना था कि स्वतंत्रता की इस लड़ाई का नेतृत्व देश के श्रमजीवी लोग ही कर सकते हैं।

श्रेया जायसवाल26 मई 2026