वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
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लड़कियां गाली दे रही हैं! ~ हूबनाथ॥बुद्धदेव भट्टाचार्य: संस्कृति और सिनेमा के संरक्षक — संजय मुखोपाध्याय॥'हंस'के अविस्मरणीय संपादक और कथाकार राजेन्द्र यादव की जयंती पर श्रद्धांजलि! - अशोक सिंह॥‘चिटगाँव’ - साधनहीन आम आदमी की जयगाथा - केशव कुमार भट्ठड़॥"मैं वापस आऊँगा : विस्थापन और वियोग की प्रेमकथा" - जवरीमल्ल पारख॥क्रांतिवीर सुबोध राय (झुंकु): चटगांव विद्रोह के महान युवा नायक॥केन्द्रीय सरकार की रिपोर्ट में बंगाल की शिक्षा व्यवस्था की भयानक तस्वीर (4,133 स्कूलों में छात्र शून्य, शिक्षक 19,502!)॥'मदर टेरेसा'॥लड़कियां गाली दे रही हैं! ~ हूबनाथ॥बुद्धदेव भट्टाचार्य: संस्कृति और सिनेमा के संरक्षक — संजय मुखोपाध्याय॥'हंस'के अविस्मरणीय संपादक और कथाकार राजेन्द्र यादव की जयंती पर श्रद्धांजलि! - अशोक सिंह॥‘चिटगाँव’ - साधनहीन आम आदमी की जयगाथा - केशव कुमार भट्ठड़॥"मैं वापस आऊँगा : विस्थापन और वियोग की प्रेमकथा" - जवरीमल्ल पारख॥क्रांतिवीर सुबोध राय (झुंकु): चटगांव विद्रोह के महान युवा नायक॥केन्द्रीय सरकार की रिपोर्ट में बंगाल की शिक्षा व्यवस्था की भयानक तस्वीर (4,133 स्कूलों में छात्र शून्य, शिक्षक 19,502!)॥'मदर टेरेसा'॥
✊ इंकलाब ज़िंदाबाद   ✊   मेहनतकश एक हों   ✊   न्याय, समानता, प्रगति   ✊   उठो ! बोलो ! बदलो !   ✊   जन संघर्ष जारी है   ✊   हम न रुकेंगे, न झुकेंगे   ✊   संविधान बचाओ   ✊   लोकतंत्र हमारा अधिकार है   ✊   विकल्प की आवाज़   ✊   ✊ इंकलाब ज़िंदाबाद   ✊   मेहनतकश एक हों   ✊   न्याय, समानता, प्रगति   ✊   उठो ! बोलो ! बदलो !   ✊   जन संघर्ष जारी है   ✊   हम न रुकेंगे, न झुकेंगे   ✊   संविधान बचाओ   ✊   लोकतंत्र हमारा अधिकार है   ✊   विकल्प की आवाज़   ✊  
लड़कियां गाली दे रही हैं! ~ हूबनाथ
साहित्य-संस्कृति

लड़कियां गाली दे रही हैं! ~ हूबनाथ

जो लोग/ गाली से भी बदतर हैं/ उन्हें शिकायत है/ कि लड़कियां/ गाली दे रही हैं। दरअसल/ लड़कियां/ वह सब कुछ/ सूद समेत लौटा रही हैं।

राजीव कुमार पाण्डेय · 5 घंटे पहले · 2 मिनट पाठ
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21
बुद्धदेव भट्टाचार्य: संस्कृति और सिनेमा के संरक्षक — संजय मुखोपाध्याय
अतिथि लेखन

बुद्धदेव भट्टाचार्य: संस्कृति और सिनेमा के संरक्षक — संजय मुखोपाध्याय

पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य का साहित्य और सिनेमा के प्रति गहरा और ऐतिहासिक योगदान रहा है। उन्होंने ऋत्विक घटक के दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेज को सहेजकर प्रकाशित करवाया तथा 'रूपकला केंद्र' जैसी संस्था के माध्यम से युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण दिलाया। जादवपुर विश्वविद्यालय के छात्रों का उत्साहवर्धन करने से लेकर कोलकाता फिल्म फेस्टिवल में विश्वस्तरीय सिनेमा को बढ़ावा देने तक, वे सदैव तत्पर रहे। राजनीति की व्यस्तताओं के बीच भी कला, विचारों और आम जनता की रुचि को बेहतर बनाने के प्रति उनका यह समर्पण अतुलनीय था। सौम्य राजनीतिक व्यक्तित्व के धनी बुद्धदेव भट्टाचार्य के आम जनता की रुचियों को समृद्ध करने के लिए सदैव तत्पर रहने वाले एक सचेतन पहलू को याद कर रहें हैं प्रो. संजय मुखोपाध्याय। पढ़ें मूल बांग्ला देशहितैषी (06.09.2024) में छपे आलेख ' 'आम जनता की पसंद और सोच को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था' का हिन्दी अनुवाद।

केशव कुमार भट्टड़ · कल · 7 मिनट पाठ
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'हंस'के अविस्मरणीय संपादक  और कथाकार राजेन्द्र यादव की जयंती पर श्रद्धांजलि! - अशोक सिंह
श्रद्धांजलि

'हंस'के अविस्मरणीय संपादक और कथाकार राजेन्द्र यादव की जयंती पर श्रद्धांजलि! - अशोक सिंह

प्रेमचंद के 'हंस' को अस्सी के दशक में फिर से प्रकाशित कर सम्पादक राजेन्द्र यादव हिन्दी साहित्य और पत्रकारिता में सबसे ज्यादा चर्चित रहे।

अपराजिता · कल · 3 मिनट पाठ
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‘चिटगाँव’ - साधनहीन आम आदमी की जयगाथा  - केशव कुमार भट्ठड़
सिनेमा

‘चिटगाँव’ - साधनहीन आम आदमी की जयगाथा - केशव कुमार भट्ठड़

फिल्म ' चिटगाँव’ चमत्कृत करती है| मास्टर दा सूर्य सेन की भूमिका में एकमात्र मनोज वाजपई को छोड़कर कोई भी ‘स्टार’ अभिनेता या अभिनेत्री इस फिल्म में नहीं है| फिल्म में ‘झुंकु ’, सुबोध रॉय के बचपन का नाम, की भूमिका में दिलजाद हवाले ने सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया है| एक बुझी-बुझी-सी आँखों वाला किशोर जिसकी दोनों आँखों में दुनिया भर का अबोध-आश्चर्य भरा है – उन्ही आँखों से वह समाज को बदलने का सपना देखता है| किशोरी क्रांतिकारी प्रीतिलता की भूमिका में वेगा तमोटिया ने प्रभावित किया| कोई व्यावसायिक मसाला, लटके झटके भी नहीं है| फिल्म में कैमरे का काम और संगीत का व्यवहार खूब ही जोरदार तरीके से लिया गया है| दर्शक के हिसाब से यह फिल्म हिंदी फिल्म जगत में मील का पत्थर है| इस तरह की शुद्ध देश-प्रेम से भरपूर संपूर्ण अंतिम फिल्म कौन सी थी, कब देखी, याद नहीं| सामाजिक दायित्व-बोध न होने पर ऐसी फ़िल्में बनाना असंभव है|

केशव कुमार भट्टड़ · 2 दिन पहले · 11 मिनट पाठ
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"मैं वापस आऊँगा : विस्थापन और वियोग की प्रेमकथा" - जवरीमल्ल पारख
सिनेमा

"मैं वापस आऊँगा : विस्थापन और वियोग की प्रेमकथा" - जवरीमल्ल पारख

फ़िल्म बताती है कि दंगे दोनों तरफ से हुए थे । हिंदुओं और सिखों ने मुसलमानों को मारा और मुसलमानों ने हिंदुओं और सिखों को मारा। सरहद के दोनों तरफ दरिंदगी का नंगा नाच चल रहा था। फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने कहा था कि पंजाबी ही पंजाबी को मार रहा था। विभाजन के समय सबसे भयावह दंगे पंजाब में ही हुए थे। लेकिन बंटवारे के समय हुए दंगों के कारण पंजाब के बाशिंदों को मजबूर होकर अपना घर और गाँव छोड़ना पड़ा। माना जाता है कि दंगों में दस से बीस लाख लोग मारे गए जिनमें हिन्दू, सिख और मुसलमान तीनों शामिल थे। मानव इतिहास में विस्थापन की ये सबसे बड़ी और भयावह घटना थी।

अपराजिता · 2 दिन पहले · 14 मिनट पाठ
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क्रांतिवीर सुबोध राय (झुंकु): चटगांव विद्रोह के महान युवा नायकश्रद्धांजलिक्रांतिवीर सुबोध राय (झुंकु): चटगांव विद्रोह के महान युवा नायकसुबोध राय (झुंकु राय) भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे युवा क्रांतिकारियों में से एक थे। मात्र 14 वर्ष की आयु में उन्होंने मास्टरदा सूर्यसेन के नेतृत्व में 1930 के चटगांव शस्त्रागार छापे और जलालाबाद युद्ध में वीरतापूर्वक भाग लिया। कम उम्र में सेलुलर जेल (काला पानी) की कठिन सजा काटने के बाद भी उनका राष्ट्रप्रेम डिगा नहीं। आजादी के बाद उन्होंने पेंशन या अन्य सरकारी सुविधाएं लेने से इनकार कर सादगीपूर्ण जीवन बिताया। उनका निष्कलंक और त्यागमय जीवन भावी पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। चटगांव आंदोलन पर बनी बॉलीवुड फिल्म 'Chittagong' (2012) की कहानी मुख्य रूप से युवा झुंकु राय (सुबोध राय) के जीवन और उनके दृष्टिकोण पर ही आधारित है।केशव कुमार भट्टड़ · 2 दिन पहले · 66 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →केन्द्रीय सरकार की रिपोर्ट में बंगाल की शिक्षा व्यवस्था की भयानक तस्वीर (4,133 स्कूलों में छात्र शून्य, शिक्षक 19,502!)राज्यकेन्द्रीय सरकार की रिपोर्ट में बंगाल की शिक्षा व्यवस्था की भयानक तस्वीर (4,133 स्कूलों में छात्र शून्य, शिक्षक 19,502!)अपराजिता · 3 दिन पहले · 22 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →'मदर टेरेसा'श्रद्धांजलि'मदर टेरेसा'अपराजिता · 3 दिन पहले · 23 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →हर चार में से एक युवा के पास नहीं है शिक्षा,  रोज़गार या व्यावसायिक कौशलराष्ट्रीयहर चार में से एक युवा के पास नहीं है शिक्षा, रोज़गार या व्यावसायिक कौशलअपराजिता · 3 दिन पहले · 11 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →दूध का कटोरा, फहराता झंडा और 'देशप्रेम प्राइवेट लिमिटेड' -  शमीक लाहिड़ीअतिथि लेखनदूध का कटोरा, फहराता झंडा और 'देशप्रेम प्राइवेट लिमिटेड' - शमीक लाहिड़ीअपराजिता · 5 दिन पहले · 13 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →
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01लड़कियां गाली दे रही हैं! ~ हूबनाथपढ़ना शुरू करें →02'हंस'के अविस्मरणीय संपादक और कथाकार राजेन्द्र यादव की जयंती पर श्रद्धांजलि! - अशोक सिंहपढ़ना शुरू करें →03क्रांतिवीर सुबोध राय (झुंकु): चटगांव विद्रोह के महान युवा नायकपढ़ना शुरू करें →04'मदर टेरेसा'पढ़ना शुरू करें →05फुटपाथ पर महिला को परेशान किया गया; ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन ने अग्निमित्रा से माफ़ी की मांग की।पढ़ना शुरू करें →06कहानी और धर्म - हूबनाथपढ़ना शुरू करें →07'दिमाग़ी नक्सल' ~ बच्चा लाल 'उन्मेष'पढ़ना शुरू करें →08"वीरकन्या प्रीतिलता"पढ़ना शुरू करें →09शुक्रियापढ़ना शुरू करें →10नजरूल की मूर्ति का चश्मा गायब, बिरसा-अंबेडकर की मूर्तियों में भी तोड़फोड़पढ़ना शुरू करें →
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क्रांतिवीर सुबोध राय (झुंकु): चटगांव विद्रोह के महान युवा नायकश्रद्धांजलिक्रांतिवीर सुबोध राय (झुंकु): चटगांव विद्रोह के महान युवा नायकसुबोध राय (झुंकु राय) भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे युवा क्रांतिकारियों में से एक थे। मात्र 14 वर्ष की आयु में उन्होंने मास्टरदा सूर्यसेन के नेतृत्व में 1930 के चटगांव शस्त्रागार छापे और जलालाबाद युद्ध में वीरतापूर्वक भाग लिया। कम उम्र में सेलुलर जेल (काला पानी) की कठिन सजा काटने के बाद भी उनका राष्ट्रप्रेम डिगा नहीं। आजादी के बाद उन्होंने पेंशन या अन्य सरकारी सुविधाएं लेने से इनकार कर सादगीपूर्ण जीवन बिताया। उनका निष्कलंक और त्यागमय जीवन भावी पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। चटगांव आंदोलन पर बनी बॉलीवुड फिल्म 'Chittagong' (2012) की कहानी मुख्य रूप से युवा झुंकु राय (सुबोध राय) के जीवन और उनके दृष्टिकोण पर ही आधारित है।केशव कुमार भट्टड़ · 2 दिन पहले · 66 क्लिककेन्द्रीय सरकार की रिपोर्ट में बंगाल की शिक्षा व्यवस्था की भयानक तस्वीर (4,133 स्कूलों में छात्र शून्य, शिक्षक 19,502!)राज्यकेन्द्रीय सरकार की रिपोर्ट में बंगाल की शिक्षा व्यवस्था की भयानक तस्वीर (4,133 स्कूलों में छात्र शून्य, शिक्षक 19,502!)शिक्षकों की कमी की तस्वीर भी चिंताजनक है। 520 स्कूलों में 8,596 छात्र होने के बावजूद एक भी शिक्षक नहीं है। वहीं 5 हजार 152 अन्य स्कूलों में 1.76 लाख से अधिक छात्रों के लिए केवल एक-एक शिक्षक है।अपराजिता · 3 दिन पहले · 22 क्लिक'मदर टेरेसा'श्रद्धांजलि'मदर टेरेसा'तुम सबकी हो प्यारी माँ मदर टेरेसाअपराजिता · 3 दिन पहले · 23 क्लिक
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दिल्ली सीमा · नवंबर 2024 से
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महाराष्ट्र · जनवरी 2026 से
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हड़ताल
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झारखंड · मार्च 2026 से
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लंबित नियुक्तियों पर अदालती फैसले के बाद आंशिक जीत।
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लड़कियां गाली दे रही हैं! ~ हूबनाथ
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जो लोग/

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राजीव कुमार पाण्डेय·5 घंटे पहले·2 मिनट पाठ·21 पाठक
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बुद्धदेव भट्टाचार्य: संस्कृति और सिनेमा के संरक्षक — संजय मुखोपाध्याय

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‘चिटगाँव’ - साधनहीन आम आदमी की जयगाथा - केशव कुमार भट्ठड़

2 दिन पहले · 11 मिनट पाठ
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बुद्धदेव भट्टाचार्य: संस्कृति और सिनेमा के संरक्षक — संजय मुखोपाध्याय

पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य का साहित्य और सिनेमा के प्रति गहरा और ऐतिहासिक योगदान रहा है। उन्होंने ऋत्विक घटक के दुर्लभ ऐतिहासिक दस्तावेज को सहेजकर प्रकाशित करवाया तथा 'रूपकला केंद्र' जैसी संस्था के माध्यम से युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण दिलाया। जादवपुर विश्वविद्यालय के छात्रों का उत्साहवर्धन करने से लेकर कोलकाता फिल्म फेस्टिवल में विश्वस्तरीय सिनेमा को बढ़ावा देने तक, वे सदैव तत्पर रहे। राजनीति की व्यस्तताओं के बीच भी कला, विचारों और आम जनता की रुचि को बेहतर बनाने के प्रति उनका यह समर्पण अतुलनीय था। सौम्य राजनीतिक व्यक्तित्व के धनी बुद्धदेव भट्टाचार्य के आम जनता की रुचियों को समृद्ध करने के लिए सदैव तत्पर रहने वाले एक सचेतन पहलू को याद कर रहें हैं प्रो. संजय मुखोपाध्याय। पढ़ें मूल बांग्ला देशहितैषी (06.09.2024) में छपे आलेख ' 'आम जनता की पसंद और सोच को बेहतर बनाने के लिए उन्होंने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था' का हिन्दी अनुवाद।

केशव कुमार भट्टड़ · 7 मिनट · 55 पाठक · कल
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प्रेमचंद के 'हंस' को अस्सी के दशक में फिर से प्रकाशित कर सम्पादक राजेन्द्र यादव हिन्दी साहित्य और पत्रकारिता में सबसे ज्यादा चर्चित रहे।

अपराजिता · 3 मिनट · 21 पाठक · कल
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‘चिटगाँव’ - साधनहीन आम आदमी की जयगाथा  - केशव कुमार भट्ठड़
सिनेमा

‘चिटगाँव’ - साधनहीन आम आदमी की जयगाथा - केशव कुमार भट्ठड़

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केशव कुमार भट्टड़ · 11 मिनट · 64 पाठक · 2 दिन पहले
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"मैं वापस आऊँगा : विस्थापन और वियोग की प्रेमकथा" - जवरीमल्ल पारख
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"मैं वापस आऊँगा : विस्थापन और वियोग की प्रेमकथा" - जवरीमल्ल पारख

फ़िल्म बताती है कि दंगे दोनों तरफ से हुए थे । हिंदुओं और सिखों ने मुसलमानों को मारा और मुसलमानों ने हिंदुओं और सिखों को मारा। सरहद के दोनों तरफ दरिंदगी का नंगा नाच चल रहा था। फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने कहा था कि पंजाबी ही पंजाबी को मार रहा था। विभाजन के समय सबसे भयावह दंगे पंजाब में ही हुए थे। लेकिन बंटवारे के समय हुए दंगों के कारण पंजाब के बाशिंदों को मजबूर होकर अपना घर और गाँव छोड़ना पड़ा। माना जाता है कि दंगों में दस से बीस लाख लोग मारे गए जिनमें हिन्दू, सिख और मुसलमान तीनों शामिल थे। मानव इतिहास में विस्थापन की ये सबसे बड़ी और भयावह घटना थी।

अपराजिता · 14 मिनट · 33 पाठक · 2 दिन पहले
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‘चिटगाँव’ - साधनहीन आम आदमी की जयगाथा  - केशव कुमार भट्ठड़

सिनेमा

‘चिटगाँव’ - साधनहीन आम आदमी की जयगाथा - केशव कुमार भट्ठड़

फिल्म 'चिटगाँव’ चमत्कृत करती है| मास्टर दा सूर्य सेन की भूमिका में एकमात्र मनोज वाजपई को छोड़कर कोई भी ‘स्टार’ अभिनेता या अभिनेत्री इस फिल्म में नहीं है| फिल्म में ‘झुंकु ’, सुबोध रॉय के बचपन का नाम, की भूमिका में दिलजाद हवाले ने सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित किया है| एक बुझी-बुझी-सी आँखों वाला किशोर जिसकी दोनों आँखों में दुनिया भर का अबोध-आश्चर्य भरा है – उन्ही आँखों से वह समाज को बदलने का सपना देखता है| किशोरी क्रांतिकारी प्रीतिलता की भूमिका में वेगा तमोटिया ने प्रभावित किया| कोई व्यावसायिक मसाला, लटके झटके भी नहीं है| फिल्म में कैमरे का काम और संगीत का व्यवहार खूब ही जोरदार तरीके से लिया गया है| दर्शक के हिसाब से यह फिल्म हिंदी फिल्म जगत में मील का पत्थर है| इस तरह की शुद्ध देश-प्रेम से भरपूर संपूर्ण अंतिम फिल्म कौन सी थी, कब देखी, याद नहीं| सामाजिक दायित्व-बोध न होने पर ऐसी फ़िल्में बनाना असंभव है|

केशव कुमार भट्टड़
• 2 दिन पहले • 64 क्लिक
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"मैं वापस आऊँगा : विस्थापन और वियोग की प्रेमकथा" - जवरीमल्ल पारख

सिनेमा

"मैं वापस आऊँगा : विस्थापन और वियोग की प्रेमकथा" - जवरीमल्ल पारख

फ़िल्म बताती है कि दंगे दोनों तरफ से हुए थे । हिंदुओं और सिखों ने मुसलमानों को मारा और मुसलमानों ने हिंदुओं और सिखों को मारा। सरहद के दोनों तरफ दरिंदगी का नंगा नाच चल रहा था। फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने कहा था कि पंजाबी ही पंजाबी को मार रहा था। विभाजन के समय सबसे भयावह दंगे पंजाब में ही हुए थे। लेकिन बंटवारे के समय हुए दंगों के कारण पंजाब के बाशिंदों को मजबूर होकर अपना घर और गाँव छोड़ना पड़ा। माना जाता है कि दंगों में दस से बीस लाख लोग मारे गए जिनमें हिन्दू, सिख और मुसलमान तीनों शामिल थे। मानव इतिहास में विस्थापन की ये सबसे बड़ी और भयावह घटना थी।

अपराजिता
• 2 दिन पहले • 33 क्लिक
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क्रांतिवीर सुबोध राय (झुंकु): चटगांव विद्रोह के महान युवा नायक

श्रद्धांजलि

क्रांतिवीर सुबोध राय (झुंकु): चटगांव विद्रोह के महान युवा नायक

सुबोध राय (झुंकु राय) भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे युवा क्रांतिकारियों में से एक थे। मात्र 14 वर्ष की आयु में उन्होंने मास्टरदा सूर्यसेन के नेतृत्व में 1930 के चटगांव शस्त्रागार छापे और जलालाबाद युद्ध में वीरतापूर्वक भाग लिया। कम उम्र में सेलुलर जेल (काला पानी) की कठिन सजा काटने के बाद भी उनका राष्ट्रप्रेम डिगा नहीं। आजादी के बाद उन्होंने पेंशन या अन्य सरकारी सुविधाएं लेने से इनकार कर सादगीपूर्ण जीवन बिताया। उनका निष्कलंक और त्यागमय जीवन भावी पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। चटगांव आंदोलन पर बनी बॉलीवुड फिल्म 'Chittagong' (2012) की कहानी मुख्य रूप से युवा झुंकु राय (सुबोध राय) के जीवन और उनके दृष्टिकोण पर ही आधारित है।

केशव कुमार भट्टड़
• 2 दिन पहले • 66 क्लिक
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केन्द्रीय सरकार की रिपोर्ट में बंगाल की शिक्षा व्यवस्था की भयानक तस्वीर (4,133 स्कूलों में छात्र शून्य, शिक्षक 19,502!)

राज्य

केन्द्रीय सरकार की रिपोर्ट में बंगाल की शिक्षा व्यवस्था की भयानक तस्वीर (4,133 स्कूलों में छात्र शून्य, शिक्षक 19,502!)

शिक्षकों की कमी की तस्वीर भी चिंताजनक है। 520 स्कूलों में 8,596 छात्र होने के बावजूद एक भी शिक्षक नहीं है। वहीं 5 हजार 152 अन्य स्कूलों में 1.76 लाख से अधिक छात्रों के लिए केवल एक-एक शिक्षक है।

अपराजिता
• 3 दिन पहले • 22 क्लिक
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'मदर टेरेसा'

श्रद्धांजलि

'मदर टेरेसा'

तुम सबकी हो प्यारी माँ मदर टेरेसा

अपराजिता
• 3 दिन पहले • 23 क्लिक
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हर चार में से एक युवा के पास नहीं है शिक्षा,  रोज़गार या व्यावसायिक कौशल

राष्ट्रीय

हर चार में से एक युवा के पास नहीं है शिक्षा, रोज़गार या व्यावसायिक कौशल

देश में 15 से 25 वर्ष के युवाओं में से लगभग 40 प्रतिशत पूरी तरह से बेरोज़गार हैं। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों से पता चलता है कि केवल 7 प्रतिशत स्नातकों को ही समय पर नौकरी मिली, जबकि शेष 93 प्रतिशत स्नातक तीन साल बाद भी किसी स्थायी काम से नहीं जुड़ सके।

अपराजिता
• 3 दिन पहले • 11 क्लिक
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दूध का कटोरा, फहराता झंडा और 'देशप्रेम प्राइवेट लिमिटेड' -  शमीक लाहिड़ी

अतिथि लेखन

दूध का कटोरा, फहराता झंडा और 'देशप्रेम प्राइवेट लिमिटेड' - शमीक लाहिड़ी

यह देश कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी नहीं है। यह देश उस माँ का है, जो फुटपाथ की हवा में चूल्हे का धुआँ मिलाती है। यह देश उस छात्र का है, जो मंत्री की धमकियों को ठेंगा दिखाता है। यह देश उस मज़दूर का है, जिसकी रीढ़ की हड्डी पर इस शहर की इमारतें खड़ी हैं। यह देश उस किसान का है, जिसके हाथों में इस मिट्टी की महक लगी है।

अपराजिता
• 5 दिन पहले • 13 क्लिक
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बीजेपी के शासन में नाराज़गी बढ़ रही है; लोगों को एकजुट कर प्रतिवाद और तेज़ करें—पानीहाटी में मोहम्मद सलीम।

राज्य

बीजेपी के शासन में नाराज़गी बढ़ रही है; लोगों को एकजुट कर प्रतिवाद और तेज़ करें—पानीहाटी में मोहम्मद सलीम।

उग्र राष्ट्रवाद का गुणगान करते हुए आरएसएस और भाजपा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस को छोटा और श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बड़ा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। पहनावे और खान-पान जैसी चीजों को लेकर भी लोगों के बीच बंटवारा किया जा रहा है। आम जनता दैनिक जीवन की जरूरतों और समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन फिर भी उन्हें एक-दूसरे से अलग करने की साजिश चलाई जा रही है।

राजीव कुमार पाण्डेय
• 5 दिन पहले • 21 क्लिक
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फुटपाथ पर महिला को परेशान किया गया; ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन ने अग्निमित्रा से माफ़ी की मांग की।

राज्य

फुटपाथ पर महिला को परेशान किया गया; ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन ने अग्निमित्रा से माफ़ी की मांग की।

ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन ने अग्निमित्रा पॉल की निंदा की

राजीव कुमार पाण्डेय
• 5 दिन पहले • 14 क्लिक
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कहानी और धर्म - हूबनाथ

साहित्य-संस्कृति

कहानी और धर्म - हूबनाथ

कहानियां/

ले जाती हैं/

कल्पना लोक में/

जहां सब कुछ/

सच्चा/

न्यायपूर्ण/

भावविभोर करने वाला/

धर्म भी वहीं/

ले जाता है।

राजीव कुमार पाण्डेय
• 6 दिन पहले • 33 क्लिक
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अकादमी के भगवाकरण के खिलाफ संस्कृति चेतना का इंकलाब

विश्लेषण

अकादमी के भगवाकरण के खिलाफ संस्कृति चेतना का इंकलाब

कोलकाता के ऐतिहासिक 'अकादमी ऑफ फाइन आर्ट्स' का दक्षिणपंथी ताकतों द्वारा जबरन भगवाकरण करने और सुरक्षाकर्मियों के कमरे पर कब्जा जमाने के बाद बंगाल की धर्मनिरपेक्ष व प्रगतिशील चेतना आक्रोशित है। 28 जून से जारी इस सांस्कृतिक अतिक्रमण के खिलाफ रंगकर्मियों, अधिवक्ताओं और नागरिक समाज ने 11 अगस्त को खुद हाथों में ब्रश उठाकर दीवारों को उसके मूल सफेद रंग में लौटाया। भाजपा द्वारा दोबारा भगवा रंग पोतने, नेताओं की धमकियों और पुलिसिया रोड़ों के बावजूद नाट्यकर्मियों ने 20 अगस्त को 6 घंटे का ऐतिहासिक सत्याग्रह किया। कलाकारों ने स्पष्ट कर दिया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक स्वायत्तता पर हमले के खिलाफ यह राज्यव्यापी आंदोलन इस सांस्कृतिक तानाशाही के अंत तक जारी रहेगा।

केशव कुमार भट्टड़
• 6 दिन पहले • 52 क्लिक
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98 हजार से अधिक स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

राष्ट्रीय

98 हजार से अधिक स्कूलों में लड़कियों के लिए शौचालय नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

केवल शौचालय बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि वहाँ पानी का नल/कनेक्शन होना चाहिए। शौचालयों का निर्माण और रखरखाव इस प्रकार किया जाना चाहिए कि छात्राओं की गोपनीयता और गरिमा बनी रहे। साथ ही दिव्यांग विद्यार्थियों की आवश्यकताओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके अलावा, स्कूलों में साबुन और पानी से हाथ धोने की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए थे।

साथ ही, लड़कियों को मुफ्त में ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल (Oxo-biodegradable) सेनेटरी नैपकिन और स्कूलों में आपातकालीन आपूर्ति सहित मासिक धर्म संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया था कि मासिक धर्म लड़कियों के स्कूल आने में कोई बाधा न बने।

अपराजिता
• 6 दिन पहले • 12 क्लिक
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जादवपुर की रात: कैंपस के दरवाजे पर फासीवाद की दस्तक? - शमीक लाहिड़ी

अतिथि लेखन

जादवपुर की रात: कैंपस के दरवाजे पर फासीवाद की दस्तक? - शमीक लाहिड़ी

इतिहास हूबहू खुद को नहीं दोहराता, लेकिन इतिहास की चेतावनियां जरूर लौट कर आती हैं। इसलिए जादवपुर की रात को सिर्फ छात्रों की आपसी झड़प मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्योंकि आज अगर विश्वविद्यालय में बाहरी राजनीतिक वाहिनी का प्रवेश सामान्य हो गया, तो कल वे दूसरे विश्वविद्यालयों में जाएंगे।

आज अगर तोड़फोड़ को राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन मान लिया गया, तो कल यह और बड़ा रूप लेगा।

आज अगर छात्रों की आवाज को ईंट, पत्थर और आग से खामोश किया जा सकता है, तो कल नागरिकों की आवाज भी बंद करा दी जाएगी।

अपराजिता
• 21 अगस्त 2026 • 42 क्लिक
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'दिमाग़ी नक्सल' ~ बच्चा लाल 'उन्मेष'

साहित्य-संस्कृति

'दिमाग़ी नक्सल' ~ बच्चा लाल 'उन्मेष'

वो दिमाग़ी नक्सल है/

क्योंकि वो पढ़ा लिखा बेरोज़गार है/

जिसके इस इस हश्र में/

वजह केवल और केवल सरकार है।

राजीव कुमार पाण्डेय
• 18 अगस्त 2026 • 56 क्लिक
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मुआवजा नहीं, पिता के नाम पर स्कूल चाहते हैं हाफिज

राज्य

मुआवजा नहीं, पिता के नाम पर स्कूल चाहते हैं हाफिज

"शेख मोहम्मद माफिक और उनके बेटे अब्दुल हाफिज पर हुआ यह नृशंस हमला सिर्फ एक परिवार पर हमला नहीं है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में फैली अव्यवस्था पर सवाल उठाने वालों को डराने और चुप कराने के मकसद से किया गया हमला है। हमारी शिक्षा व्यवस्था को कॉरपोरेट मुनाफे के हाथों में नहीं सौंपा जा सकता। इस हत्याकांड में शामिल लोगों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।"

एम.ए.बेबी

सीपीआई (एम) के महासचिव

अपराजिता
• 18 अगस्त 2026 • 14 क्लिक
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"वीरकन्या प्रीतिलता"

सिनेमा

"वीरकन्या प्रीतिलता"

प्रीतिलता वाद्देदार चटगाँव के क्रांतिकारी स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण महिला योद्धाओं में से एक थीं। उनका आत्मत्याग भारतीय उपमहाद्वीप के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अनूठा अध्याय है। उस इतिहास को सिनेमा के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाना ही 'वीरकन्या प्रीतिलता' का मुख्य उद्देश्य है।

अपराजिता
• 17 अगस्त 2026 • 8 क्लिक
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शुक्रिया

साहित्य-संस्कृति

शुक्रिया

कि जिनके पास

दिमाग़ है

उन्हें वे बरगला रहे हैं

जो अक्ल से पैदल हैं

राजीव कुमार पाण्डेय
• 17 अगस्त 2026 • 11 क्लिक
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राज्य

नजरूल की मूर्ति का चश्मा गायब, बिरसा-अंबेडकर की मूर्तियों में भी तोड़फोड़

"विद्रोही कवि की मूर्ति के साथ हुई ऐसी घटना से हम स्तब्ध हैं। जिन लोगों ने यह काम किया है, उनकी पहचान कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।"

अपराजिता
• 17 अगस्त 2026 • 20 क्लिक
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रतनलाल ब्राम्हण ने मार्क्सवाद को किताबों में नहीं,बल्कि जीवन में पढ़ा, संघर्षों में समझा और जीवन में उतारा - समन पाठक

अतिथि लेखन

रतनलाल ब्राम्हण ने मार्क्सवाद को किताबों में नहीं,बल्कि जीवन में पढ़ा, संघर्षों में समझा और जीवन में उतारा - समन पाठक

कम्युनिस्ट पार्टी ने उस आग को बुझाया नहीं—उसे सही दिशा दी। अनुशासन और राजनीतिक मार्गदर्शन ने धीरे-धीरे उनके व्यक्तित्व में बड़ा परिवर्तन लाया। उनकी उग्रता में परिपक्वता आई, व्यवहार में विनम्रता आई, लेकिन अन्याय के खिलाफ उनका अडिग रुख और भी मजबूत होता गया। अब वे केवल विद्रोही बाजे नहीं रहे—एक धुरंधर कम्युनिस्ट बन गए।

अपराजिता
• 16 अगस्त 2026 • 20 क्लिक
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आज़ादी का अर्थ!

ब्लॉग

आज़ादी का अर्थ!

अब तुम आज़ाद हो

तुम्हें पूरी दुनिया को

रास्ता दिखाना है

राजीव कुमार पाण्डेय
• 16 अगस्त 2026 • 10 क्लिक
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"स्वाधीनता " जो चुनौती लगातार तेज होती जा रही है— नीलोत्पल बसु

अतिथि लेखन

"स्वाधीनता " जो चुनौती लगातार तेज होती जा रही है— नीलोत्पल बसु

उन्यासी (79) वर्षों के बाद, एक राष्ट्र के रूप में आज हम सबसे कठिन समय के सामने आ खड़े हुए हैं; आशा का वसंत काल असंतोष के शीतकाल में बदल गया है। जो बात विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, वह यह है कि "प्रतिज्ञा को पूरा" करके "जीवन और स्वतंत्रता" के मार्ग पर देश को जगाने के लिए "नियति के साथ किए गए वादे" में निहित स्वतंत्रता की वही मौलिक चेतना ही आज प्रश्नों के घेरे में है।

अपराजिता
• 15 अगस्त 2026 • 17 क्लिक
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प्रमुख विचार

कोई प्रमुख विचार चयनित नहीं है।

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'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़321 क्लिक
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संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

न्यूज़लेटर

रोज़ शाम 7 बजे दिनभर की प्रमुख खबरें और विश्लेषण सीधे आपके ईमेल पर।

अभियान कैलेंडर

पुस्तक विमोचन: मार्क्सवाद-मेरा संघर्ष पथ - लेखक: गणेश शंकर विद्यार्थी (संपादक:मृणालिनी)। आयोजक: सीपीआई (एम) बिहार राज्य कमिटी । मुख्य अतिथि: कॉमरेड डॉ. अशोक ढावले

मंगलवार, 01 सितंबर 2026 • 12:00 | राज्य कार्यालय, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी , जमाल रोड, पटना, - 800001, बिहार

ग्राउंड रिपोर्ट
क्रांतिवीर सुबोध राय (झुंकु): चटगांव विद्रोह के महान युवा नायक
श्रद्धांजलि

क्रांतिवीर सुबोध राय (झुंकु): चटगांव विद्रोह के महान युवा नायक

सुबोध राय (झुंकु राय) भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे युवा क्रांतिकारियों में से एक थे। मात्र 14 वर्ष की आयु में उन्होंने मास्टरदा सूर्यसेन के नेतृत्व में 1930 के चटगांव शस्त्रागार छापे और जलालाबाद युद्ध में वीरतापूर्वक भाग लिया। कम उम्र में सेलुलर जेल (काला पानी) की कठिन सजा काटने के बाद भी उनका राष्ट्रप्रेम डिगा नहीं। आजादी के बाद उन्होंने पेंशन या अन्य सरकारी सुविधाएं लेने से इनकार कर सादगीपूर्ण जीवन बिताया। उनका निष्कलंक और त्यागमय जीवन भावी पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। चटगांव आंदोलन पर बनी बॉलीवुड फिल्म 'Chittagong' (2012) की कहानी मुख्य रूप से युवा झुंकु राय (सुबोध राय) के जीवन और उनके दृष्टिकोण पर ही आधारित है।

केशव कुमार भट्टड़ · 2 दिन पहले
केन्द्रीय सरकार की रिपोर्ट में बंगाल की शिक्षा व्यवस्था की भयानक तस्वीर (4,133 स्कूलों में छात्र शून्य, शिक्षक 19,502!)
राज्य

केन्द्रीय सरकार की रिपोर्ट में बंगाल की शिक्षा व्यवस्था की भयानक तस्वीर (4,133 स्कूलों में छात्र शून्य, शिक्षक 19,502!)

अपराजिता · 3 दिन पहले
'मदर टेरेसा'
श्रद्धांजलि

'मदर टेरेसा'

अपराजिता · 3 दिन पहले
3 मिनटसमझें सिर्फ 3 मिनट में
01

लड़कियां गाली दे रही हैं! ~ हूबनाथ

जो लोग/

गाली से भी बदतर हैं/

उन्हें शिकायत है/

कि लड़कियां/

गाली दे रही हैं।

दरअसल/

लड़कियां/

वह सब कुछ/

सूद समेत लौटा रही हैं।

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02

'हंस'के अविस्मरणीय संपादक और कथाकार राजेन्द्र यादव की जयंती पर श्रद्धांजलि! - अशोक सिंह

प्रेमचंद के 'हंस' को अस्सी के दशक में फिर से प्रकाशित कर सम्पादक राजेन्द्र यादव हिन्दी साहित्य और पत्रकारिता में सबसे ज्यादा चर्चित रहे।

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03

क्रांतिवीर सुबोध राय (झुंकु): चटगांव विद्रोह के महान युवा नायक

सुबोध राय (झुंकु राय) भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे युवा क्रांतिकारियों में से एक थे। मात्र 14 वर्ष की आयु में उन्होंने मास्टरदा सूर्यसेन के नेतृत्व में 1930 के चटगांव शस्त्रागार छापे और जलालाबाद युद्ध में वीरतापूर्वक भाग लिया। कम उम्र में सेलुलर जेल (काला पानी) की कठिन सजा काटने के बाद भी उनका राष्ट्रप्रेम डिगा नहीं। आजादी के बाद उन्होंने पेंशन या अन्य सरकारी सुविधाएं लेने से इनकार कर सादगीपूर्ण जीवन बिताया। उनका निष्कलंक और त्यागमय जीवन भावी पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। चटगांव आंदोलन पर बनी बॉलीवुड फिल्म 'Chittagong' (2012) की कहानी मुख्य रूप से युवा झुंकु राय (सुबोध राय) के जीवन और उनके दृष्टिकोण पर ही आधारित है।

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'मदर टेरेसा'

तुम सबकी हो प्यारी माँ मदर टेरेसा

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फुटपाथ पर महिला को परेशान किया गया; ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन ने अग्निमित्रा से माफ़ी की मांग की।

ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन ने अग्निमित्रा पॉल की निंदा की

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कहानी और धर्म - हूबनाथ

कहानियां/

ले जाती हैं/

कल्पना लोक में/

जहां सब कुछ/

सच्चा/

न्यायपूर्ण/

भावविभोर करने वाला/

धर्म भी वहीं/

ले जाता है।

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'दिमाग़ी नक्सल' ~ बच्चा लाल 'उन्मेष'

वो दिमाग़ी नक्सल है/

क्योंकि वो पढ़ा लिखा बेरोज़गार है/

जिसके इस इस हश्र में/

वजह केवल और केवल सरकार है।

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"वीरकन्या प्रीतिलता"

प्रीतिलता वाद्देदार चटगाँव के क्रांतिकारी स्वतंत्रता आंदोलन की सबसे महत्वपूर्ण महिला योद्धाओं में से एक थीं। उनका आत्मत्याग भारतीय उपमहाद्वीप के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक अनूठा अध्याय है। उस इतिहास को सिनेमा के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुँचाना ही 'वीरकन्या प्रीतिलता' का मुख्य उद्देश्य है।

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शुक्रिया

कि जिनके पास

दिमाग़ है

उन्हें वे बरगला रहे हैं

जो अक्ल से पैदल हैं

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नजरूल की मूर्ति का चश्मा गायब, बिरसा-अंबेडकर की मूर्तियों में भी तोड़फोड़

"विद्रोही कवि की मूर्ति के साथ हुई ऐसी घटना से हम स्तब्ध हैं। जिन लोगों ने यह काम किया है, उनकी पहचान कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जानी चाहिए।"

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किसान आंदोलन
दिल्ली सीमानवंबर 2024 से
न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग जारी।
सक्रिय
आशा कर्मी हड़ताल
महाराष्ट्रजनवरी 2026 से
वेतन और स्थायीकरण को लेकर राज्यव्यापी हड़ताल।
हड़ताल
मनरेगा मज़दूर मोर्चा
झारखंडमार्च 2026 से
बकाया भुगतान और कार्यदिवस बढ़ाने की माँग।
सक्रिय
शिक्षक भर्ती संघर्ष
उत्तर प्रदेशदिसंबर 2025 से
लंबित नियुक्तियों पर अदालती फैसले के बाद आंशिक जीत।
आंशिक जीत

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