वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
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गंगा काट रही है जमीन, उजड़ रहा संसार, खो रहा बचपन! : अबिन मित्र॥" लोगों से डरते हैं, इसीलिए मतदाता सूची से नाम काट देते हैं " - मोहम्मद सलीम॥अस्थिर अरुणाचल, मीडिया खामोश!- अबिन मित्र॥ब्राजील: उग्र दक्षिणपंथ की करारी हार। 'लूला' की ऐतिहासिक वापसी॥ईज़ीसीसी (EZCC) में सीताराम येचुरी पर सेमिनार॥100वें साल में उत्तमकुमार -'अकेला आता है चाँद'~संजय मुखोपाध्याय॥बुलडोजर और किताब॥किताब को विरोध का निशान बनाकर वृहस्पतिवार को निकलेगा जुलूस॥गंगा काट रही है जमीन, उजड़ रहा संसार, खो रहा बचपन! : अबिन मित्र॥" लोगों से डरते हैं, इसीलिए मतदाता सूची से नाम काट देते हैं " - मोहम्मद सलीम॥अस्थिर अरुणाचल, मीडिया खामोश!- अबिन मित्र॥ब्राजील: उग्र दक्षिणपंथ की करारी हार। 'लूला' की ऐतिहासिक वापसी॥ईज़ीसीसी (EZCC) में सीताराम येचुरी पर सेमिनार॥100वें साल में उत्तमकुमार -'अकेला आता है चाँद'~संजय मुखोपाध्याय॥बुलडोजर और किताब॥किताब को विरोध का निशान बनाकर वृहस्पतिवार को निकलेगा जुलूस॥
✊ इंकलाब ज़िंदाबाद   ✊   मेहनतकश एक हों   ✊   न्याय, समानता, प्रगति   ✊   उठो ! बोलो ! बदलो !   ✊   जन संघर्ष जारी है   ✊   हम न रुकेंगे, न झुकेंगे   ✊   संविधान बचाओ   ✊   लोकतंत्र हमारा अधिकार है   ✊   विकल्प की आवाज़   ✊   ✊ इंकलाब ज़िंदाबाद   ✊   मेहनतकश एक हों   ✊   न्याय, समानता, प्रगति   ✊   उठो ! बोलो ! बदलो !   ✊   जन संघर्ष जारी है   ✊   हम न रुकेंगे, न झुकेंगे   ✊   संविधान बचाओ   ✊   लोकतंत्र हमारा अधिकार है   ✊   विकल्प की आवाज़   ✊  
गंगा काट रही है जमीन, उजड़ रहा संसार, खो रहा बचपन! : अबिन मित्र
अतिथि लेखन

गंगा काट रही है जमीन, उजड़ रहा संसार, खो रहा बचपन! : अबिन मित्र

मालदा का गंगा का कटाव केवल नदी के तट के टूटने की घटना नहीं है। यह इंसानों के सपने टूटने का इतिहास, जड़ें उखड़ने की पीड़ा और अपनी ही जन्मभूमि पर परवासी बन जाने की एक निर्मम कहानी है। यहाँ जब गंगा टूटती है, तो केवल मिट्टी का एक टुकड़ा पानी में नहीं समा जाता, बल्कि एक परिवार की कई पीढ़ियों की यादें, एक बच्चे का सुरक्षित बचपन और एक माँ के अपने परिवार को सहेज कर रखने का आखिरी आशियाना भी ढह जाता है।

अपराजिता · 5 घंटे पहले · 5 मिनट पाठ
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12
" लोगों से डरते हैं, इसीलिए मतदाता सूची से नाम काट देते हैं " - मोहम्मद सलीम
राज्य

" लोगों से डरते हैं, इसीलिए मतदाता सूची से नाम काट देते हैं " - मोहम्मद सलीम

आरएसएस की किताब से पन्ने फाड़कर चुनाव आयोग ने एसआईआर (SIR) किया है। मतदाता सूची से कमजोर और गरीब लोगों के नाम हटाए गए हैं। अल्पसंख्यकों के नाम हटाए गए हैं। हम वामपंथियों ने बार-बार राज्य में इस एसआईआर प्रक्रिया का विरोध किया है।अब जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। इस अन्याय की जिम्मेदारी लेनी होगी।

अपराजिता · 18 घंटे पहले · 4 मिनट पाठ
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अस्थिर अरुणाचल, मीडिया खामोश!-  अबिन मित्र
अतिथि लेखन

अस्थिर अरुणाचल, मीडिया खामोश!- अबिन मित्र

अरुणाचल प्रदेश का सियांग सिर्फ एक नदी का नाम नहीं है। यह इस बात की याद दिलाता है कि विकास किसके लिए है, फैसले कौन ले रहा है, और इसकी सबसे बड़ी कीमत किसे चुकानी पड़ रही है? क्या प्रगति के नाम पर जल-जमीन-जंगल के अधिकार छीन लिए जाएंगे? क्या तरक्की के नाम पर आदिवासियों का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा? क्या सियांग के लोगों की आवाज आखिरकार बाँध के रुके हुए पानी में हमेशा के लिए डूब जाएगी? या फिर देश के लोग इस खामोशी की दीवार को तोड़ेंगे?

अपराजिता · कल · 6 मिनट पाठ
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20
ब्राजील: उग्र दक्षिणपंथ की करारी हार। 'लूला' की ऐतिहासिक वापसी
अंतर्राष्ट्रीय

ब्राजील: उग्र दक्षिणपंथ की करारी हार। 'लूला' की ऐतिहासिक वापसी

"ब्राज़ील किसी का पिछवाड़ा (backyard) नहीं है—विदेशी हस्तक्षेप और दक्षिणपंथी ताकतों को पछाड़कर वामपंथी 'लूला' की ऐतिहासिक जीत।" लैटिन अमरीकी देश ब्राज़ील में राष्ट्रपति चुनाव जीतकर लूला ने धुर दक्षिणपंथी ताकतों के उदय को करारी शिकस्त दी है। अमरीकी दबाव और मेटा के एल्गोरिदम जैसे विदेशी हस्तक्षेपों के बावजूद, लूला ने ऐतिहासिक राजनीतिक वापसी की है। पहले दौर में पिछड़ने के बाद, वामपंथी-प्रगतिशील एकजुटता और कार्य सप्ताह घटाने जैसे फैसलों ने उनकी बड़ी जीत तय की। यह नतीजा पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो और वाशिंगटन के लिए बड़ा झटका है, हालांकि संसद में दक्षिणपंथियों का दबदबा बना हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी सहित वैश्विक नेताओं ने इस जीत पर बधाई दी है, जो क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगी। लूला ने स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र सुरक्षित है और ब्राज़ील किसी भी विदेशी ताकत का पिछलग्गू नहीं बनेगा।

केशव कुमार भट्टड़ · कल · 6 मिनट पाठ
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ईज़ीसीसी (EZCC) में  सीताराम येचुरी पर सेमिनार
राष्ट्रीय

ईज़ीसीसी (EZCC) में सीताराम येचुरी पर सेमिनार

22 नवम्बर को विधाननगर के ईज़ीसीसी (EZCC) में सीताराम येचुरी के जीवन और संघर्ष पर एक सेमिनार आयोजित किया जाएगा।

अपराजिता · 2 दिन पहले · 2 मिनट पाठ
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ताज़ा खबरें
100वें साल में उत्तमकुमार -'अकेला आता है चाँद'~संजय मुखोपाध्यायसिनेमा100वें साल में उत्तमकुमार -'अकेला आता है चाँद'~संजय मुखोपाध्याय"फिल्मी परदे के साधारण फ्रेम से निकलकर जो इतिहास के फलक पर अमर हो गया, वही एकमात्र उत्तम है।" यह आलेख बांग्ला सिनेमा के महानायक उत्तम कुमार की जन्मशती के अवसर पर उनकी कला, लोकप्रियता और सांस्कृतिक प्रभाव का एक गंभीर विश्लेषण है। लेखक संजय मुखोपाध्याय बताते हैं कि बंगाली बुद्धिजीवियों ने लंबे समय तक उत्तम कुमार की लोकप्रियता को लेकर एक संकोच और अविश्वास का भाव रखा, क्योंकि वे इसे संभ्रांत कला के दायरे से बाहर मानते थे। इसके बावजूद, उत्तम कुमार केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि बंगाल की आधुनिकता, मध्यवर्गीय पहचान और सामूहिक सपनों के जीवंत प्रतीक बन गए। हॉलीवुड की मर्लिन मुनरो की तरह उन्होंने भी अपने दौर के सामाजिक और राजनीतिक तनावों के बीच खुद को ढाला। पटकथाओं की सीमाओं से परे जाकर अपने अनूठे अभिनय, देह-भाषा और सहजता से उन्होंने दर्शकों के दिलों पर राज किया। वे भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा बेजोड़ 'नक्षत्र' बनकर उभरे, जिनका प्रभाव आज भी हमारी सांस्कृतिक चेतना में अमिट है।केशव कुमार भट्टड़ · 2 दिन पहले · 232 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →बुलडोजर और किताबसाहित्य-संस्कृतिबुलडोजर और किताबराजीव कुमार पाण्डेय · 3 दिन पहले · 15 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →किताब को विरोध का निशान बनाकर वृहस्पतिवार को निकलेगा जुलूसराज्यकिताब को विरोध का निशान बनाकर वृहस्पतिवार को निकलेगा जुलूसअपराजिता · 3 दिन पहले · 12 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →बुलडोज़र कभी भी किताबों से नहीं जीत सका है: सुदीप सेनगुप्ताराज्यबुलडोज़र कभी भी किताबों से नहीं जीत सका है: सुदीप सेनगुप्ताराजीव कुमार पाण्डेय · 4 दिन पहले · 18 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →सरकार पीछे हटी, हरियाणा में हड़ताली बिजली कर्मचारियों की  बड़ी जीतराष्ट्रीयसरकार पीछे हटी, हरियाणा में हड़ताली बिजली कर्मचारियों की बड़ी जीतअपराजिता · 4 दिन पहले · 2 क्लिकपूरा लेख पढ़ें →
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01ईज़ीसीसी (EZCC) में सीताराम येचुरी पर सेमिनारपढ़ना शुरू करें →02बुलडोजर और किताबपढ़ना शुरू करें →03सरकार पीछे हटी, हरियाणा में हड़ताली बिजली कर्मचारियों की बड़ी जीतपढ़ना शुरू करें →04क्रिसमस के दिन ईसाइयों पर हमलों का मुकाबला करने के लिए मोहम्मद सलीम का आह्वानपढ़ना शुरू करें →05ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को लेकर आज देशभर में प्रदर्शनपढ़ना शुरू करें →06वे डरते है किताबों से: राजीव कुमार पाण्डेयपढ़ना शुरू करें →07चोरबागान हादसा! इस कुव्यवस्था का दोषी कौन?पढ़ना शुरू करें →08चोरबगान में हुई मार्मिक दुर्घटना: सीपीआई(एम) के सभी पार्टी कार्यालयों और बुक स्टालों पर आज शोक मनाया जाएगा- मोहम्मद सलीमपढ़ना शुरू करें →09SIR को रद्द करने की माँग को लेकर पटना में एसएफआई और डीवाईएफआई का मार्चपढ़ना शुरू करें →10दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच के 'तिरंगा मार्च' पर रोक लगाने से किया इनकारपढ़ना शुरू करें →
ग्राउंड रिपोर्ट
100वें साल में उत्तमकुमार -'अकेला आता है चाँद'~संजय मुखोपाध्यायसिनेमा100वें साल में उत्तमकुमार -'अकेला आता है चाँद'~संजय मुखोपाध्याय"फिल्मी परदे के साधारण फ्रेम से निकलकर जो इतिहास के फलक पर अमर हो गया, वही एकमात्र उत्तम है।" यह आलेख बांग्ला सिनेमा के महानायक उत्तम कुमार की जन्मशती के अवसर पर उनकी कला, लोकप्रियता और सांस्कृतिक प्रभाव का एक गंभीर विश्लेषण है। लेखक संजय मुखोपाध्याय बताते हैं कि बंगाली बुद्धिजीवियों ने लंबे समय तक उत्तम कुमार की लोकप्रियता को लेकर एक संकोच और अविश्वास का भाव रखा, क्योंकि वे इसे संभ्रांत कला के दायरे से बाहर मानते थे। इसके बावजूद, उत्तम कुमार केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि बंगाल की आधुनिकता, मध्यवर्गीय पहचान और सामूहिक सपनों के जीवंत प्रतीक बन गए। हॉलीवुड की मर्लिन मुनरो की तरह उन्होंने भी अपने दौर के सामाजिक और राजनीतिक तनावों के बीच खुद को ढाला। पटकथाओं की सीमाओं से परे जाकर अपने अनूठे अभिनय, देह-भाषा और सहजता से उन्होंने दर्शकों के दिलों पर राज किया। वे भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा बेजोड़ 'नक्षत्र' बनकर उभरे, जिनका प्रभाव आज भी हमारी सांस्कृतिक चेतना में अमिट है।केशव कुमार भट्टड़ · 2 दिन पहले · 232 क्लिकबुलडोजर और किताबसाहित्य-संस्कृतिबुलडोजर और किताबएक बुलडोजर जो प्रतीक है विध्वंस का जबकि एक किताब जो प्रतीक है सभ्यता का, क्रांति का तुम किताब का मुकाबला बुलडोजर से करोगे?राजीव कुमार पाण्डेय · 3 दिन पहले · 15 क्लिककिताब को विरोध का निशान बनाकर वृहस्पतिवार को निकलेगा जुलूसराज्यकिताब को विरोध का निशान बनाकर वृहस्पतिवार को निकलेगा जुलूसबंगाल के लोगों को यह दृश्य देखना पड़ेगा कि कुछ लोग किताबें फाड़ रहे हैं और उन्हें पैरों तले कुचल रहे हैं। अगर इस बीमारी को बढ़ने दिया गया, तो बंगाल की प्रतिष्ठा, बंगाली मूल्य और परम्पराएँ धूल में मिल जाएँगी। इसलिए, इस मूर्खतापूर्ण बर्बरता के विरोध में हम आगामी 29 अक्टूबर को 'किताबों के लिए पदयात्रा' शीर्षक कार्यक्रम का आह्वान करते हैं।अपराजिता · 3 दिन पहले · 12 क्लिक
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दिल्ली सीमा · नवंबर 2024 से
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वेतन और स्थायीकरण को लेकर राज्यव्यापी हड़ताल।
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मनरेगा मज़दूर मोर्चा
झारखंड · मार्च 2026 से
बकाया भुगतान और कार्यदिवस बढ़ाने की माँग।
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लंबित नियुक्तियों पर अदालती फैसले के बाद आंशिक जीत।
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01‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम364 क्लिक02'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़363 क्लिक03'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'339 क्लिक04दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार334 क्लिक05नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़330 क्लिक06'बदलाव का कोई शॉर्टकर्ट नहीं होता - गणेश शंकर विद्यार्थी।' अनीश अंकुर की कलम से328 क्लिक07राष्ट्र तुम किसके हो ? - शमीक लाहिड़ी308 क्लिक08प्रश्नपत्र लीक:'नीट' रद्द । जिम्मेदार कौन ?295 क्लिक09नीट महाघोटाला: क्या 'सस्ते' चरित्र और 'महंगे' पँचों की बलि चढ़ेगा देश का भविष्य? - केशव भट्टड़293 क्लिक10युग-प्रवर्तक भारतपथिक राममोहन राय :- विद्युत पाल283 क्लिक
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गंगा काट रही है जमीन, उजड़ रहा संसार, खो रहा बचपन! : अबिन मित्र
इंकलाब ज़िंदाबाद   ✊   मेहनतकश एक हों   ✊   न्याय, समानता, प्रगति   ✊   उठो ! बोलो ! बदलो !   ✊   जन संघर्ष जारी है   ✊   हम न रुकेंगे, न झुकेंगे   ✊   संविधान बचाओ   ✊   लोकतंत्र हमारा अधिकार है   ✊   विकल्प की आवाज़   ✊   इंकलाब ज़िंदाबाद   ✊   मेहनतकश एक हों   ✊   न्याय, समानता, प्रगति   ✊   उठो ! बोलो ! बदलो !   ✊   जन संघर्ष जारी है   ✊   हम न रुकेंगे, न झुकेंगे   ✊   संविधान बचाओ   ✊   लोकतंत्र हमारा अधिकार है   ✊   विकल्प की आवाज़   ✊  
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मालदा का गंगा का कटाव केवल नदी के तट के टूटने की घटना नहीं है। यह इंसानों के सपने टूटने का इतिहास, जड़ें उखड़ने की पीड़ा और अपनी ही जन्मभूमि पर परवासी बन जाने की एक निर्मम कहानी है। यहाँ जब गंगा टूटती है, तो केवल मिट्टी का एक टुकड़ा पानी में नहीं समा जाता, बल्कि एक परिवार की कई पीढ़ियों की यादें, एक बच्चे का सुरक्षित बचपन और एक माँ के अपने परिवार को सहेज कर रखने का आखिरी आशियाना भी ढह जाता है।

अपराजिता·5 घंटे पहले·5 मिनट पाठ·12 पाठक
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18 घंटे पहले · 4 मिनट पाठ
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अपराजिता · 4 मिनट · 18 पाठक · 18 घंटे पहले
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अरुणाचल प्रदेश का सियांग सिर्फ एक नदी का नाम नहीं है। यह इस बात की याद दिलाता है कि विकास किसके लिए है, फैसले कौन ले रहा है, और इसकी सबसे बड़ी कीमत किसे चुकानी पड़ रही है? क्या प्रगति के नाम पर जल-जमीन-जंगल के अधिकार छीन लिए जाएंगे? क्या तरक्की के नाम पर आदिवासियों का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा? क्या सियांग के लोगों की आवाज आखिरकार बाँध के रुके हुए पानी में हमेशा के लिए डूब जाएगी? या फिर देश के लोग इस खामोशी की दीवार को तोड़ेंगे?

अपराजिता · 6 मिनट · 20 पाठक · कल
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"ब्राज़ील किसी का पिछवाड़ा (backyard) नहीं है—विदेशी हस्तक्षेप और दक्षिणपंथी ताकतों को पछाड़कर वामपंथी 'लूला' की ऐतिहासिक जीत।" लैटिन अमरीकी देश ब्राज़ील में राष्ट्रपति चुनाव जीतकर लूला ने धुर दक्षिणपंथी ताकतों के उदय को करारी शिकस्त दी है। अमरीकी दबाव और मेटा के एल्गोरिदम जैसे विदेशी हस्तक्षेपों के बावजूद, लूला ने ऐतिहासिक राजनीतिक वापसी की है। पहले दौर में पिछड़ने के बाद, वामपंथी-प्रगतिशील एकजुटता और कार्य सप्ताह घटाने जैसे फैसलों ने उनकी बड़ी जीत तय की। यह नतीजा पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो और वाशिंगटन के लिए बड़ा झटका है, हालांकि संसद में दक्षिणपंथियों का दबदबा बना हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी सहित वैश्विक नेताओं ने इस जीत पर बधाई दी है, जो क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगी। लूला ने स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र सुरक्षित है और ब्राज़ील किसी भी विदेशी ताकत का पिछलग्गू नहीं बनेगा।

केशव कुमार भट्टड़ · 6 मिनट · 69 पाठक · कल
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ईज़ीसीसी (EZCC) में सीताराम येचुरी पर सेमिनार

22 नवम्बर को विधाननगर के ईज़ीसीसी (EZCC) में सीताराम येचुरी के जीवन और संघर्ष पर एक सेमिनार आयोजित किया जाएगा।

अपराजिता · 2 मिनट · 7 पाठक · 2 दिन पहले
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लैटिन अमरीकी देश ब्राज़ील में राष्ट्रपति चुनाव जीतकर लूला ने धुर दक्षिणपंथी ताकतों के उदय को करारी शिकस्त दी है। अमरीकी दबाव और मेटा के एल्गोरिदम जैसे विदेशी हस्तक्षेपों के बावजूद, लूला ने ऐतिहासिक राजनीतिक वापसी की है। पहले दौर में पिछड़ने के बाद, वामपंथी-प्रगतिशील एकजुटता और कार्य सप्ताह घटाने जैसे फैसलों ने उनकी बड़ी जीत तय की। यह नतीजा पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो और वाशिंगटन के लिए बड़ा झटका है, हालांकि संसद में दक्षिणपंथियों का दबदबा बना हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी सहित वैश्विक नेताओं ने इस जीत पर बधाई दी है, जो क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगी। लूला ने स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र सुरक्षित है और ब्राज़ील किसी भी विदेशी ताकत का पिछलग्गू नहीं बनेगा।

केशव कुमार भट्टड़
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100वें साल में उत्तमकुमार -'अकेला आता है चाँद'~संजय मुखोपाध्याय

सिनेमा

100वें साल में उत्तमकुमार -'अकेला आता है चाँद'~संजय मुखोपाध्याय

"फिल्मी परदे के साधारण फ्रेम से निकलकर जो इतिहास के फलक पर अमर हो गया, वही एकमात्र उत्तम है।" यह आलेख बांग्ला सिनेमा के महानायक उत्तम कुमार की जन्मशती के अवसर पर उनकी कला, लोकप्रियता और सांस्कृतिक प्रभाव का एक गंभीर विश्लेषण है। लेखक संजय मुखोपाध्याय बताते हैं कि बंगाली बुद्धिजीवियों ने लंबे समय तक उत्तम कुमार की लोकप्रियता को लेकर एक संकोच और अविश्वास का भाव रखा, क्योंकि वे इसे संभ्रांत कला के दायरे से बाहर मानते थे। इसके बावजूद, उत्तम कुमार केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि बंगाल की आधुनिकता, मध्यवर्गीय पहचान और सामूहिक सपनों के जीवंत प्रतीक बन गए। हॉलीवुड की मर्लिन मुनरो की तरह उन्होंने भी अपने दौर के सामाजिक और राजनीतिक तनावों के बीच खुद को ढाला। पटकथाओं की सीमाओं से परे जाकर अपने अनूठे अभिनय, देह-भाषा और सहजता से उन्होंने दर्शकों के दिलों पर राज किया। वे भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा बेजोड़ 'नक्षत्र' बनकर उभरे, जिनका प्रभाव आज भी हमारी सांस्कृतिक चेतना में अमिट है।

केशव कुमार भट्टड़
• 2 दिन पहले • 232 क्लिक
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बुलडोजर और किताब

साहित्य-संस्कृति

बुलडोजर और किताब

एक बुलडोजर

जो प्रतीक है विध्वंस का

जबकि

एक किताब

जो प्रतीक है

सभ्यता का, क्रांति का

तुम किताब का मुकाबला

बुलडोजर से करोगे?

राजीव कुमार पाण्डेय
• 3 दिन पहले • 15 क्लिक
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किताब को विरोध का निशान बनाकर वृहस्पतिवार को निकलेगा जुलूस

राज्य

किताब को विरोध का निशान बनाकर वृहस्पतिवार को निकलेगा जुलूस

बंगाल के लोगों को यह दृश्य देखना पड़ेगा कि कुछ लोग किताबें फाड़ रहे हैं और उन्हें पैरों तले कुचल रहे हैं। अगर इस बीमारी को बढ़ने दिया गया, तो बंगाल की प्रतिष्ठा, बंगाली मूल्य और परम्पराएँ धूल में मिल जाएँगी। इसलिए, इस मूर्खतापूर्ण बर्बरता के विरोध में हम आगामी 29 अक्टूबर को 'किताबों के लिए पदयात्रा' शीर्षक कार्यक्रम का आह्वान करते हैं।

अपराजिता
• 3 दिन पहले • 12 क्लिक
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बुलडोज़र कभी भी किताबों से नहीं जीत सका है: सुदीप सेनगुप्ता

राज्य

बुलडोज़र कभी भी किताबों से नहीं जीत सका है: सुदीप सेनगुप्ता

जाधवपुर के 8बी बस स्टैंड पर जब बुलडोज़र और कचरा ढोने वाली कॉरपोरेशन की गाड़ियाँ किताबों को कचरे की तरह फेंकने के लिए लाई गईं, जब सैकड़ों पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात कर बुकस्टॉल तोड़ने का षड्यंत्र रचा गया, तब आम लोग और वामपंथी सीना ताने बुलडोज़र के सामने खड़े हो गए। लाल झंडे की उस लौह-कठिन बाधा के सामने प्रशासन और उसके बुलडोज़र को पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा। लोगों के सम्मिलित प्रतिरोध के सामने फासीवाद की हेकड़ी चूर-चूर हो गई।

राजीव कुमार पाण्डेय
• 4 दिन पहले • 18 क्लिक
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सरकार पीछे हटी, हरियाणा में हड़ताली बिजली कर्मचारियों की  बड़ी जीत

राष्ट्रीय

सरकार पीछे हटी, हरियाणा में हड़ताली बिजली कर्मचारियों की बड़ी जीत

बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के एकजुट आंदोलन के दबाव में हरियाणा सरकार को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा है। गुरुग्राम और नूंह इलाकों में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड (Eleven Power Pvt. Ltd.) को दिए गए बिजली वितरण के समानांतर लाइसेंस (parallel license) के खिलाफ राज्यव्यापी दो दिवसीय ऐतिहासिक हड़ताल के कारण राज्य सरकार बिजली कानून की धारा 108 के तहत नीतिगत निर्देश जारी करने पर सहमत हो गई है।

अपराजिता
• 4 दिन पहले • 2 क्लिक
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उत्तर प्रदेश: मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियाँ, आयोग पर उठे गंभीर सवाल

ब्लॉग

उत्तर प्रदेश: मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियाँ, आयोग पर उठे गंभीर सवाल

"नागरिकों का अधिकार या कागजी खेल? लोकतंत्र की नींव पर सवालों का घेरा!" उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान लगभग 2.97 करोड़ नाम हटने और 84 लाख नए नाम जुड़ने से पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। पीलीभीत में 13 हजार से अधिक नामों में एक ही ईपीआईसी नंबर पर गड़बड़ी और झांसी में अजीबोगरीब नाम दर्ज होने के मामले सामने आए हैं। इन अनियमितताओं के चलते अधिकारियों पर निलंबन व एफआईआर की कार्रवाई की गई है। सीपीआई(एम) /भाकपा (माले) और विपक्षी दलों ने एसआईआर प्रक्रिया को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग की है।

नवाब उद्दीन
• 4 दिन पहले • 34 क्लिक
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क्रिसमस के दिन ईसाइयों पर हमलों का मुकाबला करने के लिए मोहम्मद सलीम का आह्वान

राज्य

क्रिसमस के दिन ईसाइयों पर हमलों का मुकाबला करने के लिए मोहम्मद सलीम का आह्वान

धर्म का राग अलापते हुए सांप्रदायिक हिंदुत्ववादियों द्वारा ईसाई धर्म के लोगों पर किए जा रहे हमलों के खिलाफ डटकर खड़े होने का आह्वान सीपीआई(एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने छात्र-युवा और तरुण समाज से किया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में हुई इन घटनाओं की निंदा करते हुए, उन्होंने आगामी क्रिसमस से पहले विभिन्न इलाकों में अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय की रक्षा के लिए युवाओं से 'रेड सांता ब्रिगेड' (Red Santa Brigade) गठित करने का आह्वान किया है।

अपराजिता
• 4 दिन पहले • 5 क्लिक
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किताबों को बर्बाद होने से रोककर 'वायरल' हुए बुजुदा

राज्य

किताबों को बर्बाद होने से रोककर 'वायरल' हुए बुजुदा

सीपीआई(एम) के पूर्णकालीन कार्यकर्ता और दमदम के रहने वाले बिपुल दा की यह तस्वीर नागरबाज़ार में सीपीआई(एम) की किताबों की दुकान पर हमले की घटना में 'वायरल' हुई थी। इलाके में 'बुजुदा' के नाम से मशहूर बिपुल दासगुप्ता, किताब फेंकने वाले नौजवानों से गुज़ारिश कर रहे थे।

राजीव कुमार पाण्डेय
• 4 दिन पहले • 18 क्लिक
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ज्ञानेश  कुमार को हटाने की माँग को लेकर आज देशभर में प्रदर्शन

राष्ट्रीय

ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को लेकर आज देशभर में प्रदर्शन

एसआईआर-विरोधी मंच 'पीपुल्स अगेंस्ट एसआईआर' के आह्वान पर आज देश का हर रास्ता एक-एक जंतर-मंतर बन जाएगा।

अपराजिता
• 5 दिन पहले • 7 क्लिक
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वे डरते है किताबों से: राजीव कुमार पाण्डेय

साहित्य-संस्कृति

वे डरते है किताबों से: राजीव कुमार पाण्डेय

कि उसे पढ़कर

उनके झूठे इतिहास के

चिथड़े उड़ जायेंगे

वे डरते है किताबों से

कि उनके फ़रेब का

भांडा फूट जाएगा

राजीव कुमार पाण्डेय
• 20 अक्टूबर 2026 • 37 क्लिक
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चोरबागान हादसा! इस कुव्यवस्था का दोषी कौन?

ब्लॉग

चोरबागान हादसा! इस कुव्यवस्था का दोषी कौन?

सरकार शुरू से ही आत्मप्रचार में लगी रही। मुख्य सड़कों को बंद करके विभिन्न तरह के तमाशे किए गए। जहाँ सड़कों की मरम्मत की जरूरत थी, वहाँ मरम्मत छोड़कर सड़कों को विभिन्न रंगों से रंगने पर पैसे खर्च किए गए, जिसकी वजह से सड़कें चिकनी हो गईं और बरसात होते ही मोटरबाइक सवार सड़क पर फिसलकर गिरने लगे। उसी आत्मप्रचार में सरकार ने इस बार पूरे राज्य में 12,400 नए पूजा पंडालों को मंजूरी दे दी, जिसकी वजह से रास्ते और कम हो गए और भीड़ को काबू करना मुश्किल काम बन गया।

आत्मप्रचार में फंसी इस सरकार ने शुरू से ही एक एजेंडे के तहत वामदलों द्वारा लगाए जाने वाले प्रगतिशील पुस्तक बिक्री केंद्र को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। तरह-तरह के उपाय किए गए और पुलिस बल को इस काम में भी लगा दिया गया कि किसी भी तरह वामपंथी किताबें न बिकने पाएँ। पुलिस बल का एक हिस्सा तो इसी काम में लगा रहा, फलस्वरूप भीड़ नियंत्रण और जनता की सुरक्षा हाशिए पर चली गई।

राजीव कुमार पाण्डेय
• 18 अक्टूबर 2026 • 18 क्लिक
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चोरबगान में हुई मार्मिक दुर्घटना: सीपीआई(एम) के सभी पार्टी कार्यालयों और बुक स्टालों पर आज शोक मनाया जाएगा- मोहम्मद सलीम

राज्य

चोरबगान में हुई मार्मिक दुर्घटना: सीपीआई(एम) के सभी पार्टी कार्यालयों और बुक स्टालों पर आज शोक मनाया जाएगा- मोहम्मद सलीम

रविवार को राज्य भर में सीपीआई(एम) के सभी पार्टी कार्यालयों और बुक स्टालों पर शोक मनाया जाएगा।

अपराजिता
• 18 अक्टूबर 2026 • 15 क्लिक
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'नई पीढ़ी तक पार्टी के संघर्ष का संदेश और अधिक पहुँचाना होगा' - मोहम्मद सलीम

राज्य

'नई पीढ़ी तक पार्टी के संघर्ष का संदेश और अधिक पहुँचाना होगा' - मोहम्मद सलीम

शासक जाति, धर्म और भाषा के नाम पर हिंसा और नफरत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर हमारी लड़ाई शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, सौहार्द और परंपरा को बचाने की है। हम शोषण-मुक्त समाज की ओर बढ़ने की शपथ लेते हैं। मजदूर, किसान और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों की एकजुटता बनाकर ही उस दिशा में आगे बढ़ना होगा।

अपराजिता
• 18 अक्टूबर 2026 • 13 क्लिक
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SIR को रद्द करने की माँग को लेकर पटना में एसएफआई और डीवाईएफआई का मार्च

राष्ट्रीय

SIR को रद्द करने की माँग को लेकर पटना में एसएफआई और डीवाईएफआई का मार्च

राष्ट्रीय ध्वज लेकर मार्च करना कोई अपराध नहीं हो सकता है।

अपराजिता
• 16 अक्टूबर 2026 • 3 क्लिक
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'सिनेमा की पाठशाला में' ~ संजय मुखोपाध्याय ~

सिनेमा

'सिनेमा की पाठशाला में' ~ संजय मुखोपाध्याय ~

"सिनेमा जब केवल मनोरंजन न रहकर विचार का हथियार बन जाता है, तो सत्ता की नींद उड़ना स्वाभाविक है!" यह आलेख सिनेमा को केवल मनोरंजन के बजाय एक गंभीर विचार और सांस्कृतिक हस्तक्षेप के रूप में देखता है। इसमें 'लेनिन' के काल से लेकर स्वतंत्र भारत में ('जवाहरलाल नेहरू' की पहल और 'सत्यजित राय-ऋत्विक घटक के योगदान से) FTII और SRFTI जैसे फिल्म शिक्षण संस्थानों के उदय और उनके इतिहास पर चर्चा की गई है। लेखक 'संजय मुखोपाध्याय' बताते हैं कि कैसे ये संस्थान नए और सचेत फिल्मकार तैयार करते हैं, जो व्यवस्था के सामने उसके खिलाफ सवाल खड़े करते हैं, और यही वजह है कि सत्ता इन सांस्कृतिक केंद्रों पर निरंतर हमले करती है।

केशव कुमार भट्टड़
• 16 अक्टूबर 2026 • 103 क्लिक
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नारी श्रम और श्रमिक राजनीति की संभावना ~ कुमार राणा ~

आधी आबादी

नारी श्रम और श्रमिक राजनीति की संभावना ~ कुमार राणा ~

यह जरूरी पाठ रेखांकित करता है कि श्रम और राजनीति की पारंपरिक परिभाषाओं में महिलाओं के योगदान को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। समाज में श्रम के असमान विभाजन के कारण महिलाओं द्वारा किया जाने वाला घरेलू और अवैतनिक कार्य आर्थिक गणनाओं से बाहर रहता है। घरेलू काम के अलावा कृषि, मजदूरी और हाल ही में शुरू हुई विभिन्न सरकारी योजनाओं व परियोजनाओं (जैसे मिड-डे मील, आंगनवाड़ी और आशा) के माध्यम से महिलाओं की कार्यक्षेत्र में भागीदारी बढ़ी है। इसके साथ ही नकद सहायता योजनाओं ने भी महिलाओं की आर्थिक पहुंच और आत्मविश्वास को कुछ हद तक बढ़ाया है। इतिहास गवाह है कि श्रमिक/मजदूर आंदोलनों में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। आज आवश्यकता इस बात की है कि महिलाओं के इन अनुभवों, रोजमर्रा की संघर्षपूर्ण मांगों और उनकी बढ़ती मुखरता को मुख्यधारा की श्रमिक राजनीति का हिस्सा बनाया जाए, ताकि वे केवल कार्य-बल संख्या बढ़ाने तक सीमित न रहकर अपने अधिकारों और संगठन की दिशा स्वयं तय कर सकें।

केशव कुमार भट्टड़
• 15 अक्टूबर 2026 • 91 क्लिक
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दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच के 'तिरंगा मार्च' पर रोक लगाने से किया इनकार

राष्ट्रीय

दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच के 'तिरंगा मार्च' पर रोक लगाने से किया इनकार

16 अक्टूबर को अभिजीत दिपके ने देश भर में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के कार्यक्रम की घोषणा की है।

अपराजिता
• 15 अक्टूबर 2026 • 4 क्लिक
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भारत के बारे में लेनिन ~ बुद्धदेव भट्टाचार्य

विश्लेषण

भारत के बारे में लेनिन ~ बुद्धदेव भट्टाचार्य

"गुलाम भारत की मुक्ति और एशियाई जन-एकता को दिशा देने वाला लेनिन का क्रांतिकारी दृष्टिकोण।" - बुद्धदेव भट्टाचार्य द्वारा बांग्ला में प्रस्तुत यह मूल-आलेख एक तारीखवार ऐतिहासिक-वैचारिक अध्ययन है, जो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन एवं औपनिवेशिक मुक्ति-संग्राम के प्रति लेनिन की गहरी विश्लेषणात्मक दृष्टि को रेखांकित करता है। अध्ययन 1900 से 1923 के मध्य रचित लेनिन के निबंधों, पत्रों, नोट्स और भाषणों के आधार पर यह स्पष्ट करता है कि उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्यवाद द्वारा भारत के आर्थिक शोषण, दमनकारी नीतियों और बंबई के मजदूर आंदोलन की क्रांतिकारी चेतना का गहन मूल्यांकन किया था। लेनिन ने औपनिवेशिक राष्ट्रवाद के मूल लोकतांत्रिक स्वरूप को पहचानते हुए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को वैश्विक सर्वहारा क्रांति और एशियाई जन-एकता से जोड़ा। कम्युनिस्ट इंटरनेशनल के मंच से मानबेंद्रनाथ रॉय के संकीर्णतावादी सिद्धांतों को संशोधित कर लेनिन ने भारतीय कम्युनिस्टों को व्यापक साम्राज्यवादी-विरोधी मंचों में भागीदारी और किसान-मजदूर आंदोलनों को संगठित करने की रणनीतिक दिशा प्रदान की। अंततः, यह आलेख स्थापित करता है कि लेनिन के अनुसार रूस, भारत, चीन आदि देशों का दुनिया की सबसे बड़ी आबादी का मालिक होना ही संघर्ष के परिणाम को तय करेगा।

केशव कुमार भट्टड़
• 13 अक्टूबर 2026 • 154 क्लिक
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आपातकाल के समय भी ऐसा दृश्य नहीं देखा - पवित्र सरकार

राष्ट्रीय

आपातकाल के समय भी ऐसा दृश्य नहीं देखा - पवित्र सरकार

'सरकार डर गई है, वे डगमगा गए हैं। इसलिए वे फासीवादी तरीके से लोकतांत्रिक आंदोलन को दबाना चाहते हैं। उन्होंने लोगों के आंदोलन पर फासीवादी शैली में हमला बोला है। सरकार चाहती तो चर्चा के लिए बैठ सकती थी, बात कर सकती थी। कुछ माँगों को स्वीकार भी किया जा सकता था। लेकिन सरकार उस रास्ते पर नहीं गई। असल में उन्हें अपनी कुर्सी की चिंता है, इसलिए यह आक्रामकता है। पहले से ही ट्रेनें रद्द कर दी गईं, मेट्रो बंद कर दी गई, उड़ानों (एयरपोर्ट) से लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। मैंने अपने जीवन में ऐसा दृश्य कभी नहीं देखा, आपातकाल के समय भी नहीं देखा।'

अपराजिता
• 12 अक्टूबर 2026 • 21 क्लिक
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प्रमुख विचार

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‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम364 क्लिक
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युग-प्रवर्तक भारतपथिक राममोहन राय :- विद्युत पाल283 क्लिक

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शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

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अभियान कैलेंडर

किताबों के लिए पदयात्रा - बुक-स्टॉल और किताबों पर बर्बर हमले के खिलाफ पुस्तक प्रेमियों की पुकार पर

शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 • 15:00 | विद्यासागर मूर्ति, कॉलेज स्क्वायर , कोलकाता

ग्राउंड रिपोर्ट
100वें साल में उत्तमकुमार -'अकेला आता है चाँद'~संजय मुखोपाध्याय
सिनेमा

100वें साल में उत्तमकुमार -'अकेला आता है चाँद'~संजय मुखोपाध्याय

"फिल्मी परदे के साधारण फ्रेम से निकलकर जो इतिहास के फलक पर अमर हो गया, वही एकमात्र उत्तम है।" यह आलेख बांग्ला सिनेमा के महानायक उत्तम कुमार की जन्मशती के अवसर पर उनकी कला, लोकप्रियता और सांस्कृतिक प्रभाव का एक गंभीर विश्लेषण है। लेखक संजय मुखोपाध्याय बताते हैं कि बंगाली बुद्धिजीवियों ने लंबे समय तक उत्तम कुमार की लोकप्रियता को लेकर एक संकोच और अविश्वास का भाव रखा, क्योंकि वे इसे संभ्रांत कला के दायरे से बाहर मानते थे। इसके बावजूद, उत्तम कुमार केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि बंगाल की आधुनिकता, मध्यवर्गीय पहचान और सामूहिक सपनों के जीवंत प्रतीक बन गए। हॉलीवुड की मर्लिन मुनरो की तरह उन्होंने भी अपने दौर के सामाजिक और राजनीतिक तनावों के बीच खुद को ढाला। पटकथाओं की सीमाओं से परे जाकर अपने अनूठे अभिनय, देह-भाषा और सहजता से उन्होंने दर्शकों के दिलों पर राज किया। वे भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा बेजोड़ 'नक्षत्र' बनकर उभरे, जिनका प्रभाव आज भी हमारी सांस्कृतिक चेतना में अमिट है।

केशव कुमार भट्टड़ · 2 दिन पहले
बुलडोजर और किताब
साहित्य-संस्कृति

बुलडोजर और किताब

राजीव कुमार पाण्डेय · 3 दिन पहले
किताब को विरोध का निशान बनाकर वृहस्पतिवार को निकलेगा जुलूस
राज्य

किताब को विरोध का निशान बनाकर वृहस्पतिवार को निकलेगा जुलूस

अपराजिता · 3 दिन पहले
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ईज़ीसीसी (EZCC) में सीताराम येचुरी पर सेमिनार

22 नवम्बर को विधाननगर के ईज़ीसीसी (EZCC) में सीताराम येचुरी के जीवन और संघर्ष पर एक सेमिनार आयोजित किया जाएगा।

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बुलडोजर और किताब

एक बुलडोजर

जो प्रतीक है विध्वंस का

जबकि

एक किताब

जो प्रतीक है

सभ्यता का, क्रांति का

तुम किताब का मुकाबला

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सरकार पीछे हटी, हरियाणा में हड़ताली बिजली कर्मचारियों की बड़ी जीत

बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के एकजुट आंदोलन के दबाव में हरियाणा सरकार को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा है। गुरुग्राम और नूंह इलाकों में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड (Eleven Power Pvt. Ltd.) को दिए गए बिजली वितरण के समानांतर लाइसेंस (parallel license) के खिलाफ राज्यव्यापी दो दिवसीय ऐतिहासिक हड़ताल के कारण राज्य सरकार बिजली कानून की धारा 108 के तहत नीतिगत निर्देश जारी करने पर सहमत हो गई है।

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क्रिसमस के दिन ईसाइयों पर हमलों का मुकाबला करने के लिए मोहम्मद सलीम का आह्वान

धर्म का राग अलापते हुए सांप्रदायिक हिंदुत्ववादियों द्वारा ईसाई धर्म के लोगों पर किए जा रहे हमलों के खिलाफ डटकर खड़े होने का आह्वान सीपीआई(एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने छात्र-युवा और तरुण समाज से किया है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में हुई इन घटनाओं की निंदा करते हुए, उन्होंने आगामी क्रिसमस से पहले विभिन्न इलाकों में अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय की रक्षा के लिए युवाओं से 'रेड सांता ब्रिगेड' (Red Santa Brigade) गठित करने का आह्वान किया है।

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ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को लेकर आज देशभर में प्रदर्शन

एसआईआर-विरोधी मंच 'पीपुल्स अगेंस्ट एसआईआर' के आह्वान पर आज देश का हर रास्ता एक-एक जंतर-मंतर बन जाएगा।

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वे डरते है किताबों से: राजीव कुमार पाण्डेय

कि उसे पढ़कर

उनके झूठे इतिहास के

चिथड़े उड़ जायेंगे

वे डरते है किताबों से

कि उनके फ़रेब का

भांडा फूट जाएगा

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चोरबागान हादसा! इस कुव्यवस्था का दोषी कौन?

सरकार शुरू से ही आत्मप्रचार में लगी रही। मुख्य सड़कों को बंद करके विभिन्न तरह के तमाशे किए गए। जहाँ सड़कों की मरम्मत की जरूरत थी, वहाँ मरम्मत छोड़कर सड़कों को विभिन्न रंगों से रंगने पर पैसे खर्च किए गए, जिसकी वजह से सड़कें चिकनी हो गईं और बरसात होते ही मोटरबाइक सवार सड़क पर फिसलकर गिरने लगे। उसी आत्मप्रचार में सरकार ने इस बार पूरे राज्य में 12,400 नए पूजा पंडालों को मंजूरी दे दी, जिसकी वजह से रास्ते और कम हो गए और भीड़ को काबू करना मुश्किल काम बन गया।

आत्मप्रचार में फंसी इस सरकार ने शुरू से ही एक एजेंडे के तहत वामदलों द्वारा लगाए जाने वाले प्रगतिशील पुस्तक बिक्री केंद्र को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। तरह-तरह के उपाय किए गए और पुलिस बल को इस काम में भी लगा दिया गया कि किसी भी तरह वामपंथी किताबें न बिकने पाएँ। पुलिस बल का एक हिस्सा तो इसी काम में लगा रहा, फलस्वरूप भीड़ नियंत्रण और जनता की सुरक्षा हाशिए पर चली गई।

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चोरबगान में हुई मार्मिक दुर्घटना: सीपीआई(एम) के सभी पार्टी कार्यालयों और बुक स्टालों पर आज शोक मनाया जाएगा- मोहम्मद सलीम

रविवार को राज्य भर में सीपीआई(एम) के सभी पार्टी कार्यालयों और बुक स्टालों पर शोक मनाया जाएगा।

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SIR को रद्द करने की माँग को लेकर पटना में एसएफआई और डीवाईएफआई का मार्च

राष्ट्रीय ध्वज लेकर मार्च करना कोई अपराध नहीं हो सकता है।

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10

दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच के 'तिरंगा मार्च' पर रोक लगाने से किया इनकार

16 अक्टूबर को अभिजीत दिपके ने देश भर में राष्ट्रीय ध्वज फहराने के कार्यक्रम की घोषणा की है।

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किसान आंदोलन
दिल्ली सीमानवंबर 2024 से
न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग जारी।
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आशा कर्मी हड़ताल
महाराष्ट्रजनवरी 2026 से
वेतन और स्थायीकरण को लेकर राज्यव्यापी हड़ताल।
हड़ताल
मनरेगा मज़दूर मोर्चा
झारखंडमार्च 2026 से
बकाया भुगतान और कार्यदिवस बढ़ाने की माँग।
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शिक्षक भर्ती संघर्ष
उत्तर प्रदेशदिसंबर 2025 से
लंबित नियुक्तियों पर अदालती फैसले के बाद आंशिक जीत।
आंशिक जीत

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