वो दिमाग़ी नक्सल है/
क्योंकि वो पढ़ा लिखा बेरोज़गार है/
जिसके इस इस हश्र में/
वजह केवल और केवल सरकार है।
जन समाचार मंच
वो दिमाग़ी नक्सल है/
क्योंकि वो पढ़ा लिखा बेरोज़गार है/
जिसके इस इस हश्र में/
वजह केवल और केवल सरकार है।

दिमाग़ी नक्सल
वो दिमाग़ी नक्सल है
क्योंकि वो जानता है
इधर एक पेड़ माँ के नाम
उधर जंगल का काम तमाम
वो दिमाग़ी नक्सल है
क्योंकि वो समझता है
क्या होता है संविधान उठाना
और क्या होता है गीता-कुरान उठाना
वो दिमाग़ी नक्सल है
क्योंकि वो सोचता है
कि क्यों नहीं कोई सोचता है
इस बात पर वह अफसोसता है
वो दिमाग़ी नक्सल है
क्योंकि वो सवाल करता है
जो जवाबदेही से भागता है
जिसका ज़मीर गणतंत्र की तरह कांपता है
वो दिमाग़ी नक्सल है
क्योंकि वो बोलता है
कि क्यों नहीं कोई बोलता है
वो हर चुप्पी के पत्ते पुरजोर खोलता है
वो दिमाग़ी नक्सल है
क्योंकि वो पढ़ा लिखा बेरोज़गार है
जिसके इस इस हश्र में
वजह केवल और केवल सरकार है।

-बच्चा लाल 'उन्मेष'
जिला भदोही, उत्तर प्रदेश स्थित ममहर गाँव के किसान परिवार में जन्म
पटना विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में कविताएँ शामिलप्रकाशित पुस्तकें: कौन जात हो भाई (कविता संग्रह) तथा छिछले प्रश्न गहरे उत्तर (कविता संग्रह),
सम्मान: साहित्य चेतना मंच, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) द्वारा तृतीय ओमप्रकाश वाल्मीकि स्मृति साहित्य सम्मान-2022.
तथा मलखान सिंह सिसोदिया कविता पुरस्कार-2022
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अपलोडर: VKA-N9LYCE • प्रकाशित: 18 अगस्त 2026 • 1 मिनट पठन

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