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जनसंघर्ष

अंधे को रोशनी दो, मृत को प्राण दो! From Distorted Histories to Stolen Future...  (विकृत इतिहास से चुराए गए भविष्य तक)

राजीव कुमार पाण्डेय24 जून 20262 मिनट पठन22 बार पढ़ा गया

राज्य भर में इतिहास के विकृतिकरण के खिलाफ और खुद मुख्यमंत्री द्वारा झूठी तथा भ्रामक जानकारी फैलाने के खिलाफ कलकत्ता विश्वविद्यालय के छात्रों की विरोध सभा!

अंधे को रोशनी दो, मृत को प्राण दो!  From Distorted Histories to Stolen Future...   (विकृत इतिहास से चुराए गए भविष्य तक)

इस राज्य में बीजेपी सरकार फासीवादी तरीके से गोएबल्स के सिद्धांत को लागू करके एक ही झूठ को बार-बार दोहराकर उसे सच साबित करने की पुरजोर कोशिश कर रही है! इतिहास को मिटाकर इतिहास के विकृत पुनर्लेखन पर राज्य सरकार उतारू है। पहले कलकत्ता विश्वविद्यालय के भीतर पश्चिम बंगाल दिवस मनाने के कार्यक्रम में राज्य के नवनियुक्त उच्च शिक्षा मंत्री द्वारा 'असली इतिहास' वाक्यांश की आड़ में असत्य इतिहास पेश करने की घटना! उसके बाद कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति हसन सोहरावर्दी के नाम पर बने सोहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदल देने की घटना! एक के बाद एक हमले कलकत्ता विश्वविद्यालय, यानी पूरे पश्चिम बंगाल के इतिहास पर किए जा रहे हैं।

राज्य भर में इतिहास के विकृतिकरण के खिलाफ और खुद मुख्यमंत्री द्वारा झूठी तथा भ्रामक जानकारी फैलाने के खिलाफ कलकत्ता विश्वविद्यालय के छात्रों की विरोध सभा!

और साथ ही NEET परीक्षा में पेपर लीक की घटना के मद्देनजर देश भर में अनगिनत छात्र-छात्राएं आत्महत्या का रास्ता चुन रहे हैं। यह वास्तव में आत्महत्या नहीं, बल्कि संस्थागत हत्या है। और इस हत्या की जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, यानी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की है। धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग में, NTA को रद्द करने की मांग में और Re-NEET की अटेंडेंस शीट जारी करने की मांग में कलकत्ता विश्वविद्यालय के छात्रों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। धर्मेंद्र प्रधान का पुतला फूंका गया!

ट्रामलाइन की जमीन से बीजेपी द्वारा इस राज्य में इतिहास को खत्म करने और दूसरी तरफ देश भर में शिक्षा व्यवस्था को खत्म करने के खिलाफ पूरे छात्र समुदाय को विरोध में उतरने का संदेश दिया एसएफआई (SFI) कलकत्ता विश्वविद्यालय ने!

#SFICalcuttaUniversity

अपलोडर: राजीव कुमार पाण्डेय

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संथाल विद्रोह: जन संघर्ष का एक स्मरणीय अध्याय - डॉ. पुलिन बिहारी बास्के

संथाल विद्रोह का मुख्य केंद्र 'दामिन-इ-कोह' था। इस शब्द का अर्थ है 'पहाड़ का आंचल' या 'पहाड़ का दुपट्टा'। पहाड़ों और जंगलों से घिरे राजमहल के आस-पास के इलाके से होकर ही मध्यकाल में आक्रमणकारियों ने बंगाल में प्रवेश किया था। उस क्षेत्र की जनजातीय आबादी कृषि कार्य में अभ्यस्त नहीं थी।

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जनसंघर्ष

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  • देशव्यापी आंदोलन: 15 मई 2026 को पूरे भारत के गाँवों में लाखों मनरेगा और खेत-मजदूरों ने मिलकर सरकार के नए 'वीबी-ग्राम (जी)' कानून के खिलाफ एक बड़ी और सफल हड़ताल की।
  • मुख्य मांगें: आंदोलनकारी मजदूरों की मांग है कि नया कानून तुरंत रद्द हो, साल में कम से कम 200 दिन का काम मिले, रोजाना 700 रुपये मजदूरी तय हो और ऑनलाइन हाजिरी का झंझट पूरी तरह बंद किया जाए।
  • रोजगार पर खतरा: मजदूरों का मानना है कि इस नए कानून से गाँवों में रोजगार की गारंटी पूरी तरह खत्म हो जाएगी और पिछले तीन महीनों से पहले ही काम ठप पड़ा है।
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  • बदहाल आंकड़े: 'लिबटेक इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल देश भर में मनरेगा के तहत काम पाने वाले परिवार, मजदूर और कुल काम के दिन भारी मात्रा में घटे हैं।
  • जानलेवा तकनीक: हाजिरी के लिए 'चेहरा पहचानने' और मोबाइल ऐप जैसी जबरन थोपी गई तकनीकों के कारण नेटवर्क न मिलने से आंध्र प्रदेश में पाँच महिला मजदूरों की सड़क हादसे में जान तक चली गई।
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केशव कुमार भट्टड़18 मई 2026

जनसंघर्ष

खाली पड़े सरकारी पदों पर भर्ती की मांग को लेकर 9 जून को बंगाल में नौजवानों का आंदोलन

भारतीय रेलवे के विभिन्न कार्यालयों में वर्तमान में लगभग तीन लाख पद खाली पड़े हैं। 15 से 29 वर्ष की आयु वर्ग में बेरोजगारी दर लगभग 9.2 प्रतिशत है, जिसमें शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर लगभग 13.3 प्रतिशत है।

राजीव कुमार पाण्डेय27 मई 2026