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कमजोरियों की पहचान कर सुधार की पहल: एम ए बेबी

राजीव कुमार पाण्डेय28 जून 20263 मिनट पठन35 बार पढ़ा गया

"भाजपा के शासनकाल में खुलेआम भ्रष्टाचार चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यकाल में जो भ्रष्टाचार हो रहा है, यह उसका केवल एक छोटा सा हिस्सा है।"

कमजोरियों की पहचान कर सुधार की पहल: एम ए बेबी

हाल ही में पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम, देश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, आदिवासियों और पार्टी की संगठनात्मक कमजोरियों से उबरने के सवाल पर सीपीआई(एम) पोलिट ब्यूरो ने तीन महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया है। शुक्रवार और शनिवार को आयोजित पोलिट ब्यूरो की बैठक में स्वीकृत इन दस्तावेजों को आगामी 11 से 13 जुलाई को होने वाली केंद्रीय समिति की बैठक में चर्चा के लिए पेश किया जाएगा। शनिवार को पत्रकारों को यह जानकारी पार्टी के महासचिव एम ए बेबी ने दी।

बेबी ने आज कहा कि हाल के विधानसभा चुनावों के राजनीतिक मूल्यांकन के साथ-साथ 'संसदीय अवसरवाद' और 'संसदीय विचलन' के मुद्दे पर सुधार पर जोर दिया गया है। स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि केवल चुनाव और संसदीय कामकाज पर अत्यधिक निर्भरता के कारण जन आंदोलन और संगठनात्मक कार्य कमजोर न हों, इस संबंध में आत्म-आलोचनात्मक मूल्यांकन और सुधार की पहल की गई है।

इसके साथ ही बेबी ने बताया कि आदिवासी क्षेत्रों में पार्टी के काम को लेकर भी एक अलग दस्तावेज स्वीकार किया गया है। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में संगठन की जो सीमाएं और कमजोरियां हैं, उन्हें चिह्नित कर सुधार की पहल की जा रही है।

पाँच राज्यों के चुनावी नतीजों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि केरल में एलडीएफ सरकार के उल्लेखनीय जन-हितैषी कार्यों के बावजूद एलडीएफ को बड़ा झटका लगा है। पश्चिम बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार बनी है। तमिलनाडु में भी नई राजनीतिक स्थिति पैदा हुई है। इन सभी अनुभवों के आधार पर ही राजनीतिक मूल्यांकन का दस्तावेज तैयार किया गया है।

सीपीआई(एम) नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्षी दलों की कमजोरियों का फायदा उठाकर, उन्हें तोड़कर अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना जैसे दलों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह कॉर्पोरेट जगत में अधिग्रहण, विलय या कब्जे की प्रक्रिया देखी जाती है, उसी तरह राजनीतिक दलों के मामले में भी फूट डालकर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रवृत्ति न केवल लोकतंत्र विरोधी है, बल्कि दलबदल विरोधी कानून के भी खिलाफ है। सीपीआई(एम) इसके खिलाफ देशव्यापी राजनीतिक अभियान आयोजित करेगी। इसके साथ ही 'इंडिया' गठबंधन सहित विभिन्न विपक्षी दलों के साथ चर्चा कर संयुक्त प्रतिरोध खड़ा करने की पहल की जाएगी।

एम ए बेबी ने केंद्र सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए। इस सिलसिले में उन्होंने केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को लेकर प्रकाशित विभिन्न रिपोर्टों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "भाजपा के शासनकाल में खुलेआम भ्रष्टाचार चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के कार्यकाल में जो भ्रष्टाचार हो रहा है, यह उसका केवल एक छोटा सा हिस्सा है।" अयोध्या के राम मंदिर में दान राशि के गबन के आरोपों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि असली दोषियों को अभी तक कानून के दायरे में नहीं लाया गया है।

फिलिस्तीन के मुद्दे पर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की हालिया टिप्पणी के संदर्भ में एम ए बेबी ने कहा कि भारत को वेस्ट बैंक और गाजा में फिलिस्तीनी जनता के प्रति और अधिक स्पष्ट एवं दृढ़ एकजुटता प्रदर्शित करनी चाहिए। इस विषय पर सोनिया गांधी ने जो चिंता व्यक्त की है, सीपीआई(एम) उससे सहमत है। उनके अनुसार, फिलिस्तीन के प्रति देश के हर स्तर पर एक शक्तिशाली एकजुटता आंदोलन खड़ा करने की आवश्यकता है। बेबी ने यह भी कहा कि अमेरिका और इजराइल द्वारा संयुक्त रूप से ईरान पर हमला करने से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा एक "आश्चर्यजनक रणनीतिक निर्णय" था।

अपलोडर: राजीव कुमार पाण्डेय

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प्रश्नपत्र लीक:'नीट' रद्द । जिम्मेदार कौन ?

पेपर माफिया बेलगाम। जिम्मेदार कौन ? नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में फैल गया था। पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है। प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं। ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं। किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना है।

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नीट पेपर लीक का 'मास्टरमाइंड' निकला NTA का अधिकारी

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न्यूज़क्लिक मामला! स्वतंत्र और जनपक्षीय मीडिया पर सरकार का हमला!कानून का घोर दुरुपयोग!

मामले का नाम: M/s PPK Newsclick Studio Pvt. Ltd. बनाम दिल्ली राज्य एवं अन्य।

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जून 2026 में, दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने न्यूज़क्लिक को बड़ी राहत दी। अदालत ने कहा कि शेयर मूल्यांकन, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और फंड के इस्तेमाल से जुड़े आरोप कोई आपराधिक मामला (जैसे धोखाधड़ी या आपराधिक विश्वासघात) नहीं बनाते हैं। आधारभूत आरोप ही खारिज होने के कारण ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी स्वतः रद्द कर दिया गया।

स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता को कोर्ट का संरक्षण

न्यूज़क्लिक पर हमला 2020-21 के आसपास हुआ — ठीक उस समय जब सरकार की कुछ नीतियों को लेकर विश्व स्तर पर सवाल उठ रहे थे। ऐसे में यह संयोग नहीं, बल्कि चुनींदा निशाना था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कहा कि 'न्यूज़क्लिक' पर लगे सारे आरोप बेबुनियाद थे। ताज्जुब करते हुए हाइकोर्ट ने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर कोई ऊपरी सीमा (कैप) नहीं थी, फिर भी ED ने छापेमारी की! विदेशी निवेश पूरी तरह कानून के अनुसार था।

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धूर्तता इस बात में है कि सत्ता "राष्ट्रीय सुरक्षा" और "मनी लॉन्ड्रिंग" जैसे गंभीर शब्दों का इस्तेमाल करके असहमति की आवाज को कुचलने की कोशिश करती है। जब कोर्ट कहता है कि "कोई शिकायतकर्ता नहीं, कोई धोखा नहीं, कोई अपराध नहीं", तब साफ हो जाता है कि पूरा मामला राजनीतिक प्रतिशोध और वैकल्पिक मीडिया को डराने का था।

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स्वतंत्र पत्रकारिता को केंद्र सरकार द्वारा प्रभावित करने के लिए चुनौती देना लोकतंत्र के लिए खतरा है — चाहे वो न्यूज़क्लिक हो या कोई और। लेकिन उसी के साथ, विदेशी फंडिंग की पारदर्शिता भी जरूरी है। असली मुद्दा यह है कि कानून का चयनात्मक इस्तेमाल (selective application) हो रहा है। जो सत्ता के अनुकूल है, उसे छूट। जो आलोचना करता है, उसके खिलाफ पूरा तंत्र सक्रिय।

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हाईकोर्ट ने कानून की गरिमा बचाई, लेकिन सवाल बाकी है — कितने ऐसे केस हैं जो कोर्ट तक नहीं पहुँच पाते? और कितनी बार ED जैसी एजेंसियों को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है?

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ED की कार्यवाही न सिर्फ बुरी नीयत वाली थी, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता पर सीधा हमला थी। यह नियमानुसार एक आर्थिक फैसला था, कोई अपराध नहीं था। पुलिस और ईडी का पूरा मामला कानून का घोर दुरुपयोग था, जिसे कोर्ट ने रद्द कर दिया।

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यह फैसला सिर्फ न्यूज़क्लिक की जीत नहीं, बल्कि असहमति के अधिकार की जीत है।

केशव कुमार भट्टड़12 जून 2026