वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
विकल्प की डिजिटल दुनिया
राष्ट्रीय

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज: दिल्ली में 'कॉकरोच' के अनशन में वांगचुक भी शामिल, साथ में एसएफआई (SFI)

राजीव कुमार पाण्डेय29 जून 20268 मिनट पठन12 बार पढ़ा गया

"अब समय आ गया है कि जनता को अतीत की याद दिलाई जाए।" उनके शब्दों में, "यह विरोध सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं है। यह आंदोलन अब छात्र-छात्राओं के खिलाफ हुई कई संगठित घटनाओं के विरोध का मंच बन चुका है।"

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज: दिल्ली में 'कॉकरोच' के अनशन में वांगचुक भी शामिल, साथ में एसएफआई (SFI)

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच पार्टी' और युवाओं के साथ पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक अनशन पर बैठ गए हैं। युवाओं के इस आंदोलन को एसएफआई (SFI) ने अपना समर्थन दिया है।

नीट (NEET) परीक्षा का प्रश्नपत्र लगातार लीक होने के कारण एक के बाद एक नीट परीक्षार्थियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं पर चिंता जताते हुए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) ने विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन किया है। गत 20 जून को वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर फिर से धरने पर बैठे थे। देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवक-युवती इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने घोषणा की थी कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक वे यह अनशन जारी रखेंगे। रविवार को इसी विरोध मंच पर लद्दाख आंदोलन के लिए प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक अनशन पर बैठ गए। कई छात्र-छात्राएं भी इस अनशन प्रदर्शन में शामिल हुए हैं।

इस दिन सबसे पहले सोनम वांगचुक और सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राजघाट पर गांधी मूर्ति को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वे हाथ में राष्ट्रीय ध्वज लेकर जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठ गए। इस दौरान वहां किसान नेता भी मौजूद थे। इस आंदोलन में शामिल होने के लिए विभिन्न छात्र संगठनों तथा किसान एवं श्रमिक संगठनों से भी अनुरोध किया गया था। इस बीच सोशल मीडिया के माध्यम से दीपक को पता चला कि जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब के कई किसान नेताओं को नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया गया है।

अनशन पर बैठे वांगचुक ने कहा, "मुझे यहाँ बैठने के लिए किसी ने मजबूर नहीं किया। कई लोग मुझसे सवाल करते हैं कि आपका कार्यक्षेत्र लद्दाख है, तो फिर आप शिक्षा के लिए सीजेपी के इस विरोध प्रदर्शन में क्यों आए? दरअसल, पिछले 40 वर्षों से छात्र मेरे बहुत करीब रहे हैं। मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है लेकिन मेरी नौकरी में कोई रुचि नहीं थी। मेरा मानना है कि शिक्षा ही आने वाली पीढ़ी के निर्माण की नींव है। इसलिए जब छात्र शिक्षा के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, तो मैं यहाँ आए बिना कैसे रह सकता था!" उन्होंने आगे कहा, "शिक्षा का उपयोग करके बच्चों का जीवन संवारना और देश को सही दिशा दिखाना ही उचित है।"

लद्दाख के संदर्भ में वांगचुक ने कहा, "हिमालय की रक्षा करना लोगों की जिम्मेदारी है। क्योंकि इस क्षेत्र से निकलने वाले पानी पर करोड़ों लोग निर्भर हैं।" उन्होंने यह भी कहा, "अगर सरकार संवेदनशील होती, तो हमें इस भीषण गर्मी में यहाँ नहीं बैठना पड़ता। नतीजतन, जब सरकार जवाबदेही से बचना चाहती है, तब लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध ही एकमात्र रास्ता बचता है। हम वही करेंगे।"

इस दिन विरोध मंच पर अमायरा के माता-पिता भी उपस्थित थे। पिछले साल स्कूल की चौथी मंजिल से गिरकर 'नीरज मोदी स्कूल' की छठी कक्षा की छात्रा अमायरा की मौत हो गई थी। मृत छात्रा के माता-पिता ने इस दिन बताया, "स्कूल प्रशासन इस घटना को दबाना चाहता था। प्रशासन ने अभी तक स्कूल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।" अमायरा की माँ ने कहा, "हम बच्चों को पढ़ाई करने के लिए स्कूल भेजते हैं। और उसी स्कूल ने उसकी जान ले ली। यह कोई लापरवाही की घटना नहीं है, मेरी बेटी की हत्या की गई है।"

दूसरी ओर, अभिजीत ने दीपके से कहा, "अब समय आ गया है कि जनता को अतीत की याद दिलाई जाए।" उनके शब्दों में, "यह विरोध सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं है। यह आंदोलन अब छात्र-छात्राओं के खिलाफ हुई कई संगठित घटनाओं के विरोध का मंच बन चुका है।"

सीजेपी के इस आंदोलन को एसएफआई ने अपना समर्थन दिया है। जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी के आंदोलन में पहले दिन से ही एसएफआई के कार्यकर्ता शामिल थे। शनिवार को अभिजीत दीपके सहित कॉकरोच पार्टी के नेताओं से मुलाकात करने जंतर-मंतर पर एसएफआई के अध्यक्ष आदर्श एम साजी, महासचिव सृजन भट्टाचार्य समेत अन्य नेतृत्व पहुंचे थे। इस संबंध में सृजन भट्टाचार्य ने कहा, "देश के बड़े हिस्से के छात्र-छात्राएं कॉकरोच पार्टी के साथ सहमत हैं। इस आंदोलन ने यह साफ कर दिया है कि पूरे देश का छात्र समाज अब सरकार पर भरोसा नहीं कर पा रहा है। कॉकरोच पार्टी वास्तव में बीजेपी सरकार की विफलताओं का परिणाम है।" उन्होंने आगे कहा, "एसएफआई ने बीते दिनों में भी शिक्षा में भ्रष्टाचार केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज

दिल्ली में 'कॉकरोच' के अनशन में वांगचुक भी शामिल, साथ में एस एफ आई

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' और युवाओं के साथ पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक अनशन पर बैठ गए हैं। युवाओं के इस आंदोलन को एसएफआई ने अपना समर्थन दिया है।

नीट (NEET) परीक्षा का प्रश्नपत्र लगातार लीक होने के कारण एक के बाद एक नीट परीक्षार्थियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं पर चिंता जताते हुए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) ने विभिन्न राज्यों में विरोध प्रदर्शन किया है। गत 20 जून को वे दिल्ली के जंतर-मंतर पर फिर से धरने पर बैठे थे। देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवक-युवती इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने घोषणा की थी कि जब तक शिक्षा मंत्री इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक वे यह अनशन जारी रखेंगे। रविवार को इसी विरोध मंच पर लद्दाख आंदोलन के लिए प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक अनशन पर बैठ गए। कई छात्र-छात्राएँ भी इस अनशन प्रदर्शन में शामिल हुए हैं।

इस दिन सबसे पहले सोनम वांगचुक और सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने राजघाट पर गाँधी मूर्ति को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद वे हाथ में राष्ट्रीय ध्वज लेकर जंतर-मंतर पर अनशन पर बैठ गए। इस दौरान वहाँ किसान नेता भी मौजूद थे। इस आंदोलन में शामिल होने के लिए विभिन्न छात्र संगठनों तथा किसान एवं श्रमिक संगठनों से भी अनुरोध किया गया था। इस बीच सोशल मीडिया के माध्यम से दीपक को पता चला कि जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल होने से रोकने के लिए हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब के कई किसान नेताओं को नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया गया है।

अनशन पर बैठे वांगचुक ने कहा, "मुझे यहाँ बैठने के लिए किसी ने मजबूर नहीं किया। कई लोग मुझसे सवाल करते हैं कि आपका कार्यक्षेत्र लद्दाख है, तो फिर आप शिक्षा के लिए सीजेपी के इस विरोध प्रदर्शन में क्यों आए? दरअसल, पिछले 40 वर्षों से छात्र मेरे बहुत करीब रहे हैं। मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है लेकिन मेरी नौकरी में कोई रुचि नहीं थी। मेरा मानना है कि शिक्षा ही आने वाली पीढ़ी के निर्माण की नींव है। इसलिए जब छात्र शिक्षा के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, तो मैं यहाँ आए बिना कैसे रह सकता था!" उन्होंने आगे कहा, "शिक्षा का उपयोग करके बच्चों का जीवन संवारना और देश को सही दिशा दिखाना ही उचित है।"

लद्दाख के संदर्भ में वांगचुक ने कहा, "हिमालय की रक्षा करना लोगों की जिम्मेदारी है। क्योंकि इस क्षेत्र से निकलने वाले पानी पर करोड़ों लोग निर्भर हैं।" उन्होंने यह भी कहा, "अगर सरकार संवेदनशील होती, तो हमें इस भीषण गर्मी में यहाँ नहीं बैठना पड़ता। नतीजतन, जब सरकार जवाबदेही से बचना चाहती है, तब लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध ही एकमात्र रास्ता बचता है। हम वही करेंगे।"

इस दिन विरोध मंच पर अमायरा के माता-पिता भी उपस्थित थे। पिछले साल स्कूल की चौथी मंजिल से गिरकर 'नीरज मोदी स्कूल' की छठी कक्षा की छात्रा अमायरा की मौत हो गई थी। मृत छात्रा के माता-पिता ने इस दिन बताया, "स्कूल प्रशासन इस घटना को दबाना चाहता था। प्रशासन ने अभी तक स्कूल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।" अमायरा की माँ ने कहा, "हम बच्चों को पढ़ाई करने के लिए स्कूल भेजते हैं। और उसी स्कूल ने उसकी जान ले ली। यह कोई लापरवाही की घटना नहीं है, मेरी बेटी की हत्या की गई है।"

दूसरी ओर, अभिजीत नदीपके ने कहा, "अब समय आ गया है कि जनता को अतीत की याद दिलाई जाए।" उनके शब्दों में, "यह विरोध सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं है। यह आंदोलन अब छात्र-छात्राओं के खिलाफ हुई कई संगठित घटनाओं के विरोध का मंच बन चुका है।"

सीजेपी के इस आंदोलन को एसएफआई ने अपना समर्थन दिया है। जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी के आंदोलन में पहले दिन से ही एसएफआई के कार्यकर्ता शामिल थे। शनिवार को अभिजीत दीपके सहित कॉकरोच पार्टी के नेताओं से मुलाकात करने जंतर-मंतर पर एसएफआई के अध्यक्ष आदर्श एम साजी, महासचिव सृजन भट्टाचार्य समेत अन्य नेतृत्व पहुंचे थे। इस संबंध में सृजन भट्टाचार्य ने कहा, "देश के बड़े हिस्से के छात्र-छात्राएं कॉकरोच पार्टी के साथ सहमत हैं। इस आंदोलन ने यह साफ कर दिया है कि पूरे देश का छात्र समाज अब सरकार पर भरोसा नहीं कर पा रहा है। कॉकरोच पार्टी वास्तव में बीजेपी सरकार की विफलताओं का परिणाम है।" उन्होंने आगे कहा, "एसएफआई ने बीते दिनों में भी शिक्षा में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन किया है और भविष्य में भी करेगी। इसलिए छात्र-विरोधी बीजेपी सरकार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी के इस आंदोलन के साथ एसएफआई हमेशा खड़ी रहेगी।"

.

.

साभार: गणशक्ति

अपलोडर: राजीव कुमार पाण्डेय

विज्ञापन
और पढ़ें
सभी देखें →
राष्ट्रीय

प्रश्नपत्र लीक:'नीट' रद्द । जिम्मेदार कौन ?

पेपर माफिया बेलगाम। जिम्मेदार कौन ? नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में फैल गया था। पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है। प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं। ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं। किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना है।

केशव कुमार भट्टड़12 मई 2026

राष्ट्रीय

नीट पेपर लीक का 'मास्टरमाइंड' निकला NTA का अधिकारी

सीबीआई ने आरोपी की पहचान पीवी कुलकर्णी के रूप में की है। जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी न केवल रसायन शास्त्र (Chemistry) के प्रोफेसर थे, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था 'एनटीए' के एक प्रभावशाली अधिकारी भी थे। इसी पद पर रहने के कारण प्रश्नपत्रों तक उनकी आसान पहुंच थी।

केशव कुमार भट्टड़15 मई 2026

राष्ट्रीय

न्यूज़क्लिक मामला! स्वतंत्र और जनपक्षीय मीडिया पर सरकार का हमला!कानून का घोर दुरुपयोग!

मामले का नाम: M/s PPK Newsclick Studio Pvt. Ltd. बनाम दिल्ली राज्य एवं अन्य।

.

जून 2026 में, दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने न्यूज़क्लिक को बड़ी राहत दी। अदालत ने कहा कि शेयर मूल्यांकन, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और फंड के इस्तेमाल से जुड़े आरोप कोई आपराधिक मामला (जैसे धोखाधड़ी या आपराधिक विश्वासघात) नहीं बनाते हैं। आधारभूत आरोप ही खारिज होने के कारण ईडी का मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी स्वतः रद्द कर दिया गया।

स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता को कोर्ट का संरक्षण

न्यूज़क्लिक पर हमला 2020-21 के आसपास हुआ — ठीक उस समय जब सरकार की कुछ नीतियों को लेकर विश्व स्तर पर सवाल उठ रहे थे। ऐसे में यह संयोग नहीं, बल्कि चुनींदा निशाना था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कहा कि 'न्यूज़क्लिक' पर लगे सारे आरोप बेबुनियाद थे। ताज्जुब करते हुए हाइकोर्ट ने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर कोई ऊपरी सीमा (कैप) नहीं थी, फिर भी ED ने छापेमारी की! विदेशी निवेश पूरी तरह कानून के अनुसार था।

.

धूर्तता इस बात में है कि सत्ता "राष्ट्रीय सुरक्षा" और "मनी लॉन्ड्रिंग" जैसे गंभीर शब्दों का इस्तेमाल करके असहमति की आवाज को कुचलने की कोशिश करती है। जब कोर्ट कहता है कि "कोई शिकायतकर्ता नहीं, कोई धोखा नहीं, कोई अपराध नहीं", तब साफ हो जाता है कि पूरा मामला राजनीतिक प्रतिशोध और वैकल्पिक मीडिया को डराने का था।

.

स्वतंत्र पत्रकारिता को केंद्र सरकार द्वारा प्रभावित करने के लिए चुनौती देना लोकतंत्र के लिए खतरा है — चाहे वो न्यूज़क्लिक हो या कोई और। लेकिन उसी के साथ, विदेशी फंडिंग की पारदर्शिता भी जरूरी है। असली मुद्दा यह है कि कानून का चयनात्मक इस्तेमाल (selective application) हो रहा है। जो सत्ता के अनुकूल है, उसे छूट। जो आलोचना करता है, उसके खिलाफ पूरा तंत्र सक्रिय।

.

हाईकोर्ट ने कानून की गरिमा बचाई, लेकिन सवाल बाकी है — कितने ऐसे केस हैं जो कोर्ट तक नहीं पहुँच पाते? और कितनी बार ED जैसी एजेंसियों को राजनीतिक हथियार बनाया जा रहा है?

.

ED की कार्यवाही न सिर्फ बुरी नीयत वाली थी, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता पर सीधा हमला थी। यह नियमानुसार एक आर्थिक फैसला था, कोई अपराध नहीं था। पुलिस और ईडी का पूरा मामला कानून का घोर दुरुपयोग था, जिसे कोर्ट ने रद्द कर दिया।

.

यह फैसला सिर्फ न्यूज़क्लिक की जीत नहीं, बल्कि असहमति के अधिकार की जीत है।

केशव कुमार भट्टड़12 जून 2026