वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 | Wednesday, 28 October 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंराष्ट्रीय

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

राष्ट्रीय

'पहाड़' पर 'दिल्ली' का ताला: स्वायत्तता छीनने पर गरजे मोहम्मद सलीम!

केशव कुमार भट्टड़•14 सितंबर 20267 मिनट पठन233 बार पढ़ा गया

'पहाड़' की ताकत 'पहाड़' के हाथों में क्यों नहीं?! अफसरों के दम पर स्वायत्तता का नाटक बंद करो!" स्वायत्तता छीने जाने पर गरजे मोहम्मद सलीम!" - दार्जिलिंग के कलामंदिर हॉल में आयोजित कार्यकर्ताओं की सभा में सीपीआई(एम) पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार स्वायत्त निकाय जीटीए (GTA) में प्रतिनिधियों के चुनाव कराने के बजाय प्रशासक बिठाकर लोकतंत्र और पहाड़ के अधिकारों का हनन कर रही है। कश्मीर से लद्दाख और दार्जिलिंग तक क्षेत्रीय स्वायत्तता को खत्म करने की साजिश का दावा करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि भाजपा न तो बहुलतावाद को मानती है और न ही विविधता का सम्मान करती है। पार्टी ने घोषणा की कि वे संविधान की छठी अनुसूची, भूमि अधिकार, चाय बागान श्रमिकों की बदहाली, पर्यावरण विनाश और नागरिकता के नाम पर हो रहे भेदभाव के मुद्दों को लेकर अक्टूबर-नवंबर में पहाड़ की जनता के बीच एक व्यापक जन-अभियान चलाएंगे।

'पहाड़' पर 'दिल्ली' का ताला: स्वायत्तता छीनने पर गरजे मोहम्मद सलीम!


पहाड़ की ताक़त पर 'दिल्ली' का ताला: स्वायत्तता छीने जाने पर गरजे मोहम्मद सलीम!

'पहाड़' की ताकत 'पहाड़' के हाथों में क्यों नहीं ?

मोहम्मद सलीम का सीधा सवाल

पश्चिम बंगाल। दार्जिलिंग: आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पहाड़ की जनता को उनका संवैधानिक और निर्वाचित स्वायत्त अधिकार देने से भाग रही है। रविवार को दार्जिलिंग के ऐतिहासिक कलामंदिर हॉल में सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं की सभा को संबोधित करते हुए पार्टी के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने केंद्र की जनविरोधी नीतियों पर करारा प्रहार किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भाजपा सत्ता का विकेंद्रीकरण नहीं, बल्कि दिल्ली से चलने वाली एकाधिकारवादी व्यवस्था थोपना चाहती है। मोहम्मद सलीम ने कहा, "

भाजपा और आरएसएस न तो भारत की बहुलतावादी संस्कृति में विश्वास रखते हैं और न ही विविधता में एकता को स्वीकार करते हैं। यही वजह है कि जीटीए (GTA) में जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की स्वायत्त संस्था बनाने के बजाय प्रशासनिक अफसर बिठाकर लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।"

राहुल सांकृत्यायन को नमन और जनसभा में नेताओं का तांता

रविवार को दार्जिलिंग और कर्सियांग एरिया कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में दार्जिलिंग शहर स्थित कला मंदिर हॉल में एक प्रभावी कार्यकर्ता सम्मेलन और जनसभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में मोहम्मद सलीम ने महापंडित राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस जनसभा में मंच पर प्रमुख नेताओं की मौजूदगी रही। मंच पर लगे मुख्य बैनर पर नेपाली/देवनागरी लिपि में ' भारतको कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)' का स्पष्ट उल्लेख है, जो पहाड़ के गोरखा समाज भाषाई भाषियों के साथ वामपंथ के आत्मीय जुड़ाव को दर्शाता है। मंच पर मोहम्मद सलीम के साथ सीपीआई(एम) के दार्जिलिंग जिला सचिव समन पाठक, वरिष्ठ नेता मयूख विश्वास, गौतम घोष, दिलीप सिंह, सचिन खाती और केबी वातार सहित कई प्रमुख नेता मुस्तैदी से डटे नजर आए।

क्षेत्रीय स्वायत्तता पर हमला: कश्मीर से लद्दाख और दार्जिलिंग तक एक ही साजिश

विकेंद्रीकरण और स्वायत्तता के प्रति भाजपा-आरएसएस के तानाशाही रवैये को उजागर करते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि किसी भी क्षेत्र की स्थानीय समस्याओं का सही और सटीक समाधान वहां की जनता ही कर सकती है। लेकिन भाजपा को जनता का यह अधिकार बर्दाश्त नहीं है। आजादी के बाद से देश के कई केंद्र शासित प्रदेशों को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया, लेकिन मोदी सरकार ने उल्टी गंगा बहाते हुए पूर्ण राज्य कश्मीर को तोड़कर दो केंद्र शासित प्रदेशों में तब्दील कर दिया और पूरे क्षेत्र को अस्थिरता में धकेल दिया। आज लद्दाख की जनता जब अपने स्वायत्त अधिकारों के लिए सड़कों पर है, उनके प्रमुख नेता और जननायक सोनम वांगचुक को जेल की सलाखों के पीछे रखा गया। भाजपा न तो मानवाधिकार समझती है और न ही लोकतांत्रिक व भाषाई विविधता का सम्मान करती है; वह जबरन 'एक देश, एक सोच' का तानाशाही ढांचा थोप रही है।

अफसरों के दम पर स्वायत्तता नहीं चलती: नौकरशाही राज पर मोहम्मद सलीम का करारा तंज

कार्यकर्ता-सभा के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए मोहम्मद सलीम ने केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा हाल ही में घोषित 'टास्क फोर्स' और जीटीए में प्रशासक की नियुक्ति पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि बिना वास्तविक और अधिकार-संपन्न स्वायत्तता के कोई भी स्वायत्त निकाय केवल सफेद हाथी साबित होता है। इसके लिए चुने हुए प्रतिनिधियों का होना अनिवार्य है। इतिहास याद दिलाते हुए उन्होंने कहा कि ब्रिटिश हुकूमत के दौर में भी देशबंधु चित्तरंजन दास को स्वायत्त शासन के लिए अंग्रेजों को छह-छह बार चिट्ठियां लिखनी पड़ी थीं। प्रशासनिक अफसरों को बिठाकर कभी क्षेत्रीय स्वायत्तता नहीं दी जा सकती। सलीम ने चेतावनी दी कि जिस रफ्तार से हर जगह प्रशासक बिठाए जा रहे हैं, कल को विधानसभाओं में विधायकों के अधिकार भी छीन लिए जाएंगे और मुख्यमंत्री केवल दिल्ली के फरमानों का ऐलान करने वाले कठपुतली बनकर रह जाएंगे।

स्थायी राजनीतिक समाधान और संविधान की छठी अनुसूची ही एकमात्र रास्ता

पहाड़ के मुद्दों पर भाजपा के खोखले वादों की धज्जियां उड़ाते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि भाजपा ने आज तक पहाड़ के लोगों से किया एक भी वादा पूरा नहीं किया। वामपंथियों का रुख हमेशा साफ और अडिग रहा है- संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत पहाड़ में चुनी हुई स्वायत्त संस्था का गठन किया जाए और स्थायी राजनीतिक प्रक्रिया शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि भाजपा हर चुनाव में अलग राग अलापती है; कभी राजनीतिक समाधान का झांसा देती है, तो अब 'टास्क फोर्स' का नाटक रच रही है। मोहम्मद सलीम ने याद दिलाया कि वाममोर्चा सरकार के कार्यकाल में ही पहाड़ की स्वायत्तता को सुरक्षित करने के लिए त्रिपक्षीय समझौते हुए थे। अगर उन नीतियों को ईमानदारी से लागू किया जाता, तो सत्ता के विकेंद्रीकरण के साथ-साथ पहाड़ को विकास के लिए पर्याप्त वित्तीय और प्राकृतिक संसाधनों का सीधा अधिकार मिलता।

वाममोर्चा का सुशासन बनाम तृणमूल-भाजपा का दमनकारी मॉडल

मोहम्मद सलीम ने जनता को वाममोर्चा सरकार के उस दौर की याद दिलाई जब पूरे पश्चिम बंगाल में त्रिस्तरीय पंचायत और नगर निकायों को संवैधानिक अधिकार देकर सत्ता का वास्तविक विकेंद्रीकरण किया गया था। त्रिपुरा की वाममोर्चा सरकार ने भी जनजातीय क्षेत्रों के लिए स्वायत्त जिला परिषद (ADC) का ऐतिहासिक गठन किया था। इसके विपरीत, बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल सरकार ने पंचायतों और नगर पालिकाओं के अधिकारों पर डकैती डाली, और केंद्र की भाजपा सरकार ने आकर पूरे लोकतंत्र को ही ठप कर दिया है। दार्जिलिंग में जीटीए का निर्माण जिस उद्देश्य और जन-आकांक्षाओं के लिए हुआ था, उसे पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया गया है।

अक्टूबर-नवंबर में सीपीआई(एम) का 'पहाड़ बचाओ' व्यापक जन-अभियान

पत्रकार वार्ता में सीपीआई(एम) दार्जिलिंग जिला सचिव समन पाठक ने घोषणा की कि आगामी अक्टूबर और नवंबर के महीनों में पार्टी पहाड़ की ज्वलंत समस्याओं को लेकर सीधे जनता के दरवाजे तक जाएगी। समन पाठक ने कहा -

कॉर्पोरेट घरानों की गिद्ध दृष्टि और अंधाधुंध दोहन के कारण पहाड़ का पर्यावरण पूरी तरह तबाह हो रहा है, जिससे आए दिन भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं में आम मासूम लोगों की जान जा रही है। इसके साथ ही बंद पड़े चाय बागानों और श्रमिकों का भयावह आर्थिक संकट पहाड़ को निगल रहा है। सीपीआई(एम) इन तमाम मुद्दों पर आम जनता को एकजुट कर एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा करेगी।

बुनियादी सवालों से ध्यान भटकाने के लिए नफरत और सीएए (CAA) का खतरनाक खेल

मोहम्मद सलीम ने पहाड़ के आम नागरिकों के मुख्य दर्द को रेखांकित करते हुए कहा कि आज पहाड़ की असली लड़ाई क्या है? लगातार आती प्राकृतिक आपदाएं, बाढ़ से बेघर होते परिवार, चाय बागान मजदूरों की घुटती सांसें, टूटी सड़कें, पीने के पानी का संकट, जमीन के मालिकाना हक का अभाव, बेरोजगारी, और बदहाल शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएं! लेकिन भाजपा इन बुनियादी सवालों का जवाब देने के बजाय जाति और धर्म के नाम पर नफरत का जहर घोल रही है। भाजपा सरकार पूरी तरह से फासीवादी हथकंडे अपनाकर आम लोगों के मानवाधिकार, लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकार छीन रही है। SIR (समरी रिवीजन) के नाम पर पहाड़ के मूल निवासियों, अल्पसंख्यकों और आदिवासियों के नाम मतदाता सूचियों से गायब किए जा रहे हैं।

सीएए (CAA) पर पूछे गए सवाल का मुंहतोड़ जवाब देते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि इस कानून से आखिर कितने लोगों को नागरिकता मिली? यह कानून मूल रूप से देश के पश्चिमी छोर (राजस्थान, गुजरात, पंजाब) में पाकिस्तान से आए उन शरणार्थियों की कागजी समस्याओं को दूर करने के लिए था जो अपनी डिग्री या सर्टिफिकेट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे। लेकिन पूर्वी भारत में भाजपा ने इस कानून का इस्तेमाल सिर्फ समाज को बांटने के लिए किया है। कभी 'बांग्लादेशी' तो कभी 'रोहिंग्या' का डर दिखाकर अपनों को ही देश का दुश्मन ठहराया जा रहा है। मोहम्मद सलीम ने दो टूक कहा, "सीएए नागरिकता देने का कानून है ही नहीं, यह तो देश के वैध-नागरिकों को अवैध-नागरिक बनाने की एक गहरी और खतरनाक साजिश है।"



साभार: बांग्ला दैनिक गणशक्ति। 14.09.2026

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

'पहाड़' पर 'दिल्ली' का ताला: स्वायत्तता छीनने पर गरजे मोहम्मद सलीम!

प्रकाशित: 14 सितंबर 2026 • 7 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

364 क्लिक

2

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

363 क्लिक

3

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

339 क्लिक

4

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

334 क्लिक

5

नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़

330 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

किताबों के लिए पदयात्रा - बुक-स्टॉल और किताबों पर बर्बर हमले के खिलाफ पुस्तक प्रेमियों की पुकार पर

शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 • 15:00 | विद्यासागर मूर्ति, कॉलेज स्क्वायर , कोलकाता

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
अंतर्राष्ट्रीय

ब्राजील: उग्र दक्षिणपंथ की करारी हार। 'लूला' की ऐतिहासिक वापसी

"ब्राज़ील किसी का पिछवाड़ा (backyard) नहीं है—विदेशी हस्तक्षेप और दक्षिणपंथी ताकतों को पछाड़कर वामपंथी 'लूला' की ऐतिहासिक जीत।"

लैटिन अमरीकी देश ब्राज़ील में राष्ट्रपति चुनाव जीतकर लूला ने धुर दक्षिणपंथी ताकतों के उदय को करारी शिकस्त दी है। अमरीकी दबाव और मेटा के एल्गोरिदम जैसे विदेशी हस्तक्षेपों के बावजूद, लूला ने ऐतिहासिक राजनीतिक वापसी की है। पहले दौर में पिछड़ने के बाद, वामपंथी-प्रगतिशील एकजुटता और कार्य सप्ताह घटाने जैसे फैसलों ने उनकी बड़ी जीत तय की। यह नतीजा पूर्व राष्ट्रपति बोल्सोनारो और वाशिंगटन के लिए बड़ा झटका है, हालांकि संसद में दक्षिणपंथियों का दबदबा बना हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी सहित वैश्विक नेताओं ने इस जीत पर बधाई दी है, जो क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगी। लूला ने स्पष्ट किया है कि लोकतंत्र सुरक्षित है और ब्राज़ील किसी भी विदेशी ताकत का पिछलग्गू नहीं बनेगा।

26 अक्टूबर 2026

सिनेमा

100वें साल में उत्तमकुमार -'अकेला आता है चाँद'~संजय मुखोपाध्याय

"फिल्मी परदे के साधारण फ्रेम से निकलकर जो इतिहास के फलक पर अमर हो गया, वही एकमात्र उत्तम है।" यह आलेख बांग्ला सिनेमा के महानायक उत्तम कुमार की जन्मशती के अवसर पर उनकी कला, लोकप्रियता और सांस्कृतिक प्रभाव का एक गंभीर विश्लेषण है। लेखक संजय मुखोपाध्याय बताते हैं कि बंगाली बुद्धिजीवियों ने लंबे समय तक उत्तम कुमार की लोकप्रियता को लेकर एक संकोच और अविश्वास का भाव रखा, क्योंकि वे इसे संभ्रांत कला के दायरे से बाहर मानते थे। इसके बावजूद, उत्तम कुमार केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि बंगाल की आधुनिकता, मध्यवर्गीय पहचान और सामूहिक सपनों के जीवंत प्रतीक बन गए। हॉलीवुड की मर्लिन मुनरो की तरह उन्होंने भी अपने दौर के सामाजिक और राजनीतिक तनावों के बीच खुद को ढाला। पटकथाओं की सीमाओं से परे जाकर अपने अनूठे अभिनय, देह-भाषा और सहजता से उन्होंने दर्शकों के दिलों पर राज किया। वे भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा बेजोड़ 'नक्षत्र' बनकर उभरे, जिनका प्रभाव आज भी हमारी सांस्कृतिक चेतना में अमिट है।

25 अक्टूबर 2026

सिनेमा

'सिनेमा की पाठशाला में' ~ संजय मुखोपाध्याय ~

"सिनेमा जब केवल मनोरंजन न रहकर विचार का हथियार बन जाता है, तो सत्ता की नींद उड़ना स्वाभाविक है!" यह आलेख सिनेमा को केवल मनोरंजन के बजाय एक गंभीर विचार और सांस्कृतिक हस्तक्षेप के रूप में देखता है। इसमें 'लेनिन' के काल से लेकर स्वतंत्र भारत में ('जवाहरलाल नेहरू' की पहल और 'सत्यजित राय-ऋत्विक घटक के योगदान से) FTII और SRFTI जैसे फिल्म शिक्षण संस्थानों के उदय और उनके इतिहास पर चर्चा की गई है। लेखक 'संजय मुखोपाध्याय' बताते हैं कि कैसे ये संस्थान नए और सचेत फिल्मकार तैयार करते हैं, जो व्यवस्था के सामने उसके खिलाफ सवाल खड़े करते हैं, और यही वजह है कि सत्ता इन सांस्कृतिक केंद्रों पर निरंतर हमले करती है।

16 अक्टूबर 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
राष्ट्रीय

प्रश्नपत्र लीक:'नीट' रद्द । जिम्मेदार कौन ?

पेपर माफिया बेलगाम। जिम्मेदार कौन ?
नीट प्रश्नपत्र लीक के पीछे एक अत्यंत संगठित गिरोह होने की बात जांचकर्ता मान रहे है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रश्नपत्र राजस्थान, हरियाणा, केरल, जम्मू- काश्मीर, तेलंगाना और आंध्रप्रदेश में फैल गया था पूरा काम अत्यंत संगठित तरीके से होता है । प्रश्नपत्र विभिन्न चरणों में अलग-अलग स्तरों पर बेचे जाते हैं ये सीधे छात्रों को नहीं बेचे जाते। प्रश्नपत्र बेचने के लिए अलग 'थोक' और 'खुदरा' बाजार होते हैं। किसी भी परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक गिरोह में 100 करोड़ रुपये से अधिक के लेनदेन की संभावना है।

केशव कुमार भट्टड़ • 12 मई 2026

राष्ट्रीय

नीट पेपर लीक का 'मास्टरमाइंड' निकला NTA का अधिकारी

सीबीआई ने आरोपी की पहचान पीवी कुलकर्णी के रूप में की है। जांच में सामने आया है कि कुलकर्णी न केवल रसायन शास्त्र (Chemistry) के प्रोफेसर थे, बल्कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था 'एनटीए' के एक प्रभावशाली अधिकारी भी थे। इसी पद पर रहने के कारण प्रश्नपत्रों तक उनकी आसान पहुंच थी।

केशव कुमार भट्टड़ • 15 मई 2026

राष्ट्रीय

मूर्तियां तोड़ी जा सकती हैं, विचार नहीं ■ प्रो. जेता सांकृत्यायन

पश्चिम बंगाल के रानीगंज से हाल ही में महापंडित राहुल सांकृत्यायन की मूर्ति गायब कर दिए जाने पर प्रोफेसर जेता सांकृत्यायन की विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आई है। जेता सांकृत्यायन अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे हैं। राहुल सांकृत्यायन और उनकी पत्नी डॉ. कमला सांकृत्यायन (जो स्वयं एक लेखिका और विद्वान थीं) के बेटे हैं। उन्होंने उत्तर बंगाल विश्वविद्यालय (North Bengal University) और सिक्किम यूनिवर्सिटी (गंगटोक) में लंबे समय तक अर्थशास्त्र विभाग में अपनी सेवाएं दी हैं। प्रो. जेता सांकृत्यायन अपने पिता महापंडित राहुल सांकृत्यायन के साहित्यिक और ऐतिहासिक योगदान को संजोने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

केशव कुमार भट्टड़ • 17 जुलाई 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement