वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 | Wednesday, 28 October 2026
|
संपर्क: vaamkiaawaz@gmail.comसदस्यता में
वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़ (Vaam Ki Aawaz)
अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ,न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !
लाइव कवरेज
होमताज़ा खबरेंराज्य

वाम की आवाज़

जन समाचार मंच

राज्य

'नई पीढ़ी तक पार्टी के संघर्ष का संदेश और अधिक पहुँचाना होगा' - मोहम्मद सलीम

अपराजिता•18 अक्टूबर 20264 मिनट पठन13 बार पढ़ा गया

शासक जाति, धर्म और भाषा के नाम पर हिंसा और नफरत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर हमारी लड़ाई शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, सौहार्द और परंपरा को बचाने की है। हम शोषण-मुक्त समाज की ओर बढ़ने की शपथ लेते हैं। मजदूर, किसान और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों की एकजुटता बनाकर ही उस दिशा में आगे बढ़ना होगा।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी के

107 वें स्थापना दिवस पर

'नई पीढ़ी तक पार्टी के संघर्ष का संदेश और अधिक पहुँचाना होगा'

मोहम्मद सलीम

अक्टूबर— पार्टी के 107 वें स्थापना दिवस पर सीपीआई (एम) के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने पार्टी के सभी सदस्यों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को बधाई व शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि

" नई पीढ़ी के बीच कम्युनिस्टों के संघर्ष के प्रति रुचि पैदा हुई है। उनके पास हमें पार्टी के संघर्ष का संदेश और अधिक से अधिक पहुँचाना होगा। "

1917 में कॉमरेड वी.आई. लेनिन के नेतृत्व में रूस में समाजवादी क्रांति सफल होने के बाद, कई अन्य देशों की तरह भारत में भी साम्यवादी विचारधारा को प्रोत्साहन मिला। ब्रिटिश भारत में कम्युनिस्ट पार्टी का गठन करने में बाधाएँ थीं, इसलिए 17 अक्टूबर 1920 को विदेश में ताशकंद में कुछ नेताओं की पहल पर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना हुई। इसके बाद धीरे-धीरे भारत में विभिन्न कम्युनिस्ट व्यक्तियों और समूहों को एकजुट करके पार्टी संगठन का निर्माण हुआ। शनिवार को स्थापना दिवस के अवसर पर कोलकाता और जिलों में सीपीआई (एम) के कार्यालयों पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने लाल झंडा फहराया और सभाएँ कीं। हालाँकि शारदोत्सव के कारण कोई बड़ा कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया।

स्थापना दिवस पर शुरुआती दौर को याद दिलाते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि

"भारत में कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के बाद से ही ब्रिटिश साम्राज्यवाद एक के बाद एक षड्यंत्र के मामलों (कॉन्स्पिरेसी केसेज) को लेकर टूट पड़ा था। पेशावर, मेरठ, कानपुर और लाहौर षड्यंत्र मामले में, जो लोग वहाँ कम्युनिस्ट आंदोलन के अग्रदूत थे और आंदोलन को संगठित कर रहे थे, उन्हें जेल भेज दिया गया। इसके बावजूद पार्टी का काम रुका नहीं। पार्टी ने मेहनतकश लोगों को संगठित किया और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी माँगें उठाईं। इसके अलावा, स्वतंत्रता आंदोलन केवल शिक्षित मध्यमवर्गीय शहरी वर्ग का आंदोलन बन कर न रह जाए, बल्कि मेहनतकश लोगों का आंदोलन बने, इसके लिए उसने आजादी की लड़ाई में मेहनतकश जनता को इकट्ठा किया।"

मजदूर-किसान-छात्र-युवा-महिला सांस्कृतिक आंदोलन खड़े किए। साथ ही, जब भी प्राकृतिक आपदा, युद्ध, अकाल या दंगों में लोग मुसीबत में पड़े, कम्युनिस्ट पार्टी लोगों की मदद के लिए आगे आई।

इसी परंपरा की धारा में आज के दिन भी पार्टी के आगे बढ़ने के संकल्प को दोहराते हुए मोहम्मद सलीम ने कहा कि मालदा में इस त्योहार के समय भी भूतनी के चौर (दियारा क्षेत्र) में असहाय लोगों के साथ पार्टी कार्यकर्ता ही खड़े हुए हैं। जिन पर मदद करने की जिम्मेदारी थी, वह सरकार उत्सव मनाने में व्यस्त है, लेकिन असहाय लोगों के साथ नहीं खड़ी हुई। वर्तमान समय में सरकार गुंडा-दमन कानून के नाम पर धमकियाँ दे रही है, पार्टी कार्यालयों और किताबों के स्टॉलों पर हमले व तोड़फोड़ कर रही है। पुलिस कहीं अति-सक्रिय तो कहीं निष्क्रिय रहकर हमलावरों को बढ़ावा दे रही है। हम त्योहार के दौरान कोई बड़ा कार्यक्रम नहीं कर रहे हैं, हम चाहते हैं कि उत्सव शांतिपूर्वक मनाया जाए।

लेकिन अगर वामपंथियों के बुक स्टॉलों पर हमले होते हैं, तो आम जनता को साथ लेकर उसका मुकाबला करने के लिए तैयार रहना होगा। अधिक से अधिक लोग कम्युनिस्ट पार्टी के बारे में जानने में रुचि ले रहे हैं, किताबें पढ़ रहे हैं और खरीद रहे हैं। देश भर में संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए, शिक्षा को बचाने के लिए, ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नई पीढ़ी सड़कों पर उतरी है। स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास और वामपंथियों की भूमिका के प्रति उनकी उत्सुकता बढ़ी है। शोषण-मुक्त समतामूलक समाज के लिए कम्युनिस्टों के संघर्ष के बारे में वे जानना चाहते हैं। उनके पास हमें अपना प्रचार और किताबें और अधिक संख्या में ले जानी होंगी।

शासक जाति, धर्म और भाषा के नाम पर हिंसा और नफरत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी ओर हमारी लड़ाई शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, सौहार्द और परंपरा को बचाने की है। हम शोषण-मुक्त समाज की ओर बढ़ने की शपथ लेते हैं। मजदूर, किसान और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों की एकजुटता बनाकर ही उस दिशा में आगे बढ़ना होगा।

.

.

साभार बांग्ला दैनिक गणशक्ति

क्या यह लेख उपयोगी था?

टिप्पणियाँ

0

अपनी राय साझा करें

टिप्पणियाँ लोड हो रही हैं...

'नई पीढ़ी तक पार्टी के संघर्ष का संदेश और अधिक पहुँचाना होगा' - मोहम्मद सलीम

प्रकाशित: 18 अक्टूबर 2026 • 4 मिनट पठन

वाम की आवाज़|जन समाचार मंच
विज्ञापन

शेयर करें

सबसे ज्यादा पढ़ी गईं

1

‘अपने घेरे से बाहर: विचारों की रचनात्मक दुनिया के साथ’ - मोहम्मद सलीम

364 क्लिक

2

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

363 क्लिक

3

'उत्तम कुमार': एक नक्षत्र का अस्त हो जाना ~ 'सत्यजीत राय'

339 क्लिक

4

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

334 क्लिक

5

नीट पेपर लीक कांड : केंद्र सरकार की गंभीरता पर '?' है। - केशव भट्टड़

330 क्लिक

विज्ञापन

संसाधन

शहीद ए आजम भगत सिंह के विचार - संकलनकर्ता श्रेया जायसवाल (PDF)

'तुम्हारी क्षय' - राहुल सांकृत्यायन (PDF)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (Link)

वियतनाम: संघर्ष की एक ओजस्वी प्रेरणा - बुद्धदेव भट्टाचार्य (PDF)

सीपीआई (एम) पश्चिम बंगाल की वेब साइट (बांग्ला) (Link)

भाजपा क्यों है जनता की दुश्मन ? (PDF)

द लेफ्ट व्यूज - द पीपल्स लेंस (अंग्रेजी) (Link)

क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा (PDF)

पुरानी फिल्मों में होता था संदेश - सीताराम येचुरी (Link)

मैं नास्तिक क्यों हूँ ? - शहीद-ए-आजम भगतसिंह (PDF)

वाममोर्चा घोषणापत्र। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव-2026 (PDF)

मार्क्सवादी पथ पत्रिका (बांग्ला) (Link)

अभियान कैलेंडर

किताबों के लिए पदयात्रा - बुक-स्टॉल और किताबों पर बर्बर हमले के खिलाफ पुस्तक प्रेमियों की पुकार पर

शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 • 15:00 | विद्यासागर मूर्ति, कॉलेज स्क्वायर , कोलकाता

जुड़े रहने के लिए

रोज़ शाम 7 बजे प्रमुख खबरें सीधे आपके ईमेल पर।

सदस्यता लें
इस लेखक से और
सभी देखें →
अतिथि लेखन

गंगा काट रही है जमीन, उजड़ रहा संसार, खो रहा बचपन! : अबिन मित्र

मालदा का गंगा का कटाव केवल नदी के तट के टूटने की घटना नहीं है। यह इंसानों के सपने टूटने का इतिहास, जड़ें उखड़ने की पीड़ा और अपनी ही जन्मभूमि पर परवासी बन जाने की एक निर्मम कहानी है। यहाँ जब गंगा टूटती है, तो केवल मिट्टी का एक टुकड़ा पानी में नहीं समा जाता, बल्कि एक परिवार की कई पीढ़ियों की यादें, एक बच्चे का सुरक्षित बचपन और एक माँ के अपने परिवार को सहेज कर रखने का आखिरी आशियाना भी ढह जाता है।

कुछ घंटे पहले

राज्य

" लोगों से डरते हैं, इसीलिए मतदाता सूची से नाम काट देते हैं " - मोहम्मद सलीम

आरएसएस की किताब से पन्ने फाड़कर चुनाव आयोग ने एसआईआर (SIR) किया है। मतदाता सूची से कमजोर और गरीब लोगों के नाम हटाए गए हैं। अल्पसंख्यकों के नाम हटाए गए हैं। हम वामपंथियों ने बार-बार राज्य में इस एसआईआर प्रक्रिया का विरोध किया है।अब जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। इस अन्याय की जिम्मेदारी लेनी होगी।

कुछ घंटे पहले

अतिथि लेखन

अस्थिर अरुणाचल, मीडिया खामोश!- अबिन मित्र

अरुणाचल प्रदेश का सियांग सिर्फ एक नदी का नाम नहीं है। यह इस बात की याद दिलाता है कि विकास किसके लिए है, फैसले कौन ले रहा है, और इसकी सबसे बड़ी कीमत किसे चुकानी पड़ रही है? क्या प्रगति के नाम पर जल-जमीन-जंगल के अधिकार छीन लिए जाएंगे? क्या तरक्की के नाम पर आदिवासियों का नामोनिशान मिटा दिया जाएगा? क्या सियांग के लोगों की आवाज आखिरकार बाँध के रुके हुए पानी में हमेशा के लिए डूब जाएगी? या फिर देश के लोग इस खामोशी की दीवार को तोड़ेंगे?

26 अक्टूबर 2026

और पढ़ें
सभी देखें →
राज्य

'लेफ्ट फॉर फ्यूचर' - बंगाल की सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों का एक आधुनिक मॉडल - केशव भट्टड़

पश्चिम बंगाल का राजनीतिक आकाश आज दो ध्रुवों — टीएमसी और भाजपा — के बीच आपसी वोट लाभ के लिए कुटिल योजना से फँसा दिया गया है। SIR , दबंगता, झूठ और पैसे के दम पर लोकतंत्र के अपहरण की पूरी तैयारी है। एक तरफ है राज्य सत्ता की मशीनरी, परिवारवाद और भ्रष्टाचार की संस्कृति। दूसरी तरफ है केंद्र का SIR अटैक, सांप्रदायिक विभाजन, संस्थाओं पर नियंत्रण और विकास के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति। दोनों ही दल पूंजीवादी-नवउदारवादी मॉडल पर टिके हुए हैं, जो आर्थिक असमानता को बढ़ावा देते हैं, पर्यावरण की उपेक्षा करते हैं और केवल मुनाफे को प्राथमिकता देते हैं। इन नीतियों के कारण किसान, मजदूर, छात्र, युवा और महिलाओं सहित आम नागरिकों की आवाज दब रही है, उनकी चिंताएं उपेक्षित हो रही हैं और उनके हितों को नुकसान पहुंच रहा है। लेकिन लेफ्ट फ्रंट न तो केवल टीएमसी का विकल्प है और न ही केवल भाजपा का। यह उससे कहीं ज्यादा हैं। लेफ्ट फ्रंट एक स्वतंत्र वैचारिक शक्ति है जो न सत्ता की लूट को बढ़ावा देती है और न ही धर्म के नाम पर समाज को बाँटती है। टीएमसी और भाजपा के भ्रष्टाचार तथा सांप्रदायिक कोलाहल से पूरी तरह अलग, लेफ्ट फ्रंट तीसरा रास्ता प्रस्तुत कर रहा है — लोकतंत्र, समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित एक प्रगतिशील भविष्य का रास्ता, जिसका नाम है “लेफ्ट फॉर फ्यूचर”।

केशव कुमार भट्टड़ • 13 अप्रैल 2026

राज्य

दानवीय नियम लाकर कर्मचारियों के अधिकार छीन रही राज्य सरकार

सोशल मीडिया पर समाज के सभी वर्गों के लोग भाजपा सरकार के इस दिशा-निर्देश को लेकर गुस्सा जताने लगे हैं। सत्ता में आने के बाद भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और सिंडिकेट को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' नीति के साथ काम शुरू करने का वादा करने वाली सरकार अचानक कर्मचारियों के पीछे क्यों हाथ धोकर पड़ गई है?

श्रेया जायसवाल • 22 मई 2026

राज्य

राष्ट्र तुम किसके हो ? - शमीक लाहिड़ी

प्रश्न पूछना ही नागरिक का धर्म है- भारत का लोकतंत्र आज एक संधिकाल से गुजर रहा है। यदि सूचनाओं को छिपाकर जनता के जनादेश को बदलने का प्रयास किया जाता है, तो यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात होगा।

श्रेया जायसवाल • 19 अप्रैल 2026

वाम की आवाज़ लोगो
वाम की आवाज़

अगर थक गए हो चुप रहकर सहने से, रगों में खून उबल रहा है अन्याय के खिलाफ, न्याय, समानता और प्रगति में हैं विश्वास तो — उठो ! बोलो ! बदलो !

मुख्य पन्ने
जानकारी
हमारे बारे में
संपादकीय नीति
सुधार नीति
गोपनीयता नीति
संपर्क करें
आर्काइव
अभियान कैलेंडर आर्काइव
© 2026 वाम की आवाज़ — जन संघर्ष का डिजिटल पुरालेखMade for the Movement